उदयपुर में फिर खिला कमल! भाजपा 53 सीटों के साथ बहुमत में, लगातार सातवीं बार बोर्ड बनने के आसार

उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने शहर की सियासत की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। 80 वार्डों के चुनाव परिणाम में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 53 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 23 वार्डों में सफलता मिली है। वहीं एक वार्ड में माकपा और तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इन परिणामों के साथ उदयपुर नगर निगम में भाजपा का लगातार सातवीं बार बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।

भाजपा की इस बड़ी जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के कई इलाकों में भाजपा समर्थक जीत का जश्न मनाते नजर आए। ढोल-नगाड़ों के साथ कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई और विजयी प्रत्याशियों को बधाइयां दीं। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम में लगातार सातवीं बार सत्ता कायम रखने की तस्वीर सामने आ रही है।

चौंकाने वाले नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

चुनाव परिणामों में कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आए हैं, जिन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है। सबसे चर्चित परिणाम वार्ड नंबर 60 का रहा, जहां उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के वार्ड में भाजपा की बागी प्रत्याशी खुशबू मेहता ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की।

इसके अलावा वार्ड नंबर 61 से निर्दलीय इंद्रा मीणा और वार्ड नंबर 11 से निर्दलीय कमलेश बोराणा ने भी जीत हासिल की है। निर्दलीयों की इन जीत ने नगर निगम के चुनाव परिणामों को और दिलचस्प बना दिया है।

महापौर पद के दावेदारों ने भी मारी बाजी

उदयपुर नगर निगम के चुनाव में कई बड़े नामों की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। वार्ड नंबर 51 से भाजपा के प्रमोद सामर ने कांग्रेस के गजेंद्र सिंह को हराकर जीत दर्ज की है। प्रमोद सामर को महापौर पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। ऐसे में उनकी जीत के बाद महापौर पद को लेकर भाजपा के भीतर सियासी चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

वहीं वार्ड नंबर 24 से पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी ने भी चुनाव जीत लिया है। पारस सिंघवी का नाम भी महापौर पद के दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

इसके अलावा अतुल चंडालिया और आकाश वागरेचा ने भी अपने-अपने वार्डों से जीत दर्ज कर भाजपा की स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

डॉ. हितांशी शर्मा भी जीतीं

चुनाव परिणामों में एक और चर्चित नाम डॉ. हितांशी शर्मा का रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के भाई की बहू डॉ. हितांशी शर्मा ने भी चुनाव में जीत हासिल की है। उनकी जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे भी महत्वपूर्ण परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।

अब महापौर की कुर्सी पर नजर

80 वार्डों में भाजपा के 53 पार्षद चुने जाने के बाद नगर निगम में पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है। अब चुनाव परिणामों के बाद सबसे बड़ा सवाल उदयपुर का अगला महापौर कौन होगा? इसको लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्रमोद सामर और पारस सिंघवी जैसे अनुभवी चेहरों की जीत के बाद महापौर पद की दौड़ और भी दिलचस्प हो गई है। अब भाजपा नेतृत्व किस नाम पर भरोसा जताता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

फिलहाल चुनाव परिणामों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि उदयपुर नगर निगम में भाजपा का दबदबा कायम है और लगातार सातवीं बार भाजपा का बोर्ड बनने की तस्वीर साफ नजर आ रही है। अब शहर की निगाहें महापौर पद के फैसले और नए बोर्ड की आगे की रणनीति पर टिकी हैं।

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