उदयपुर। नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा ने 53 वार्डों में जीत दर्ज की, कांग्रेस 23 सीटों पर रही और कई वार्डों में निर्दलीय व अन्य प्रत्याशियों ने भी मुकाबला जीता। लेकिन इन चुनावी नतीजों के बीच एक ऐसा आंकड़ा भी सामने आया है, जिसने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए सोचने का सवाल खड़ा कर दिया है। उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में कुल 4674 मतदाताओं ने NOTA का विकल्प चुना।
यानी इन मतदाताओं ने चुनाव मैदान में मौजूद किसी भी प्रत्याशी को अपना समर्थन देने के बजाय ईवीएम पर NOTA यानी ‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प चुना। यह आंकड़ा भले ही किसी प्रत्याशी की जीत या हार को सीधे तय नहीं करता, लेकिन चुनाव में मतदाताओं की पसंद और नापसंद को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर देता है।
वार्ड 42 में सबसे ज्यादा NOTA
नगर निगम के सभी 80 वार्डों में NOTA के वोट दर्ज हुए। इनमें सबसे ज्यादा NOTA वार्ड नंबर 42 में रहा, जहां 106 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को चुनने के बजाय NOTA दबाया।
इसके बाद वार्ड नंबर 35 में 103 और वार्ड नंबर 21 में 101 मतदाताओं ने NOTA का इस्तेमाल किया। इस तरह तीन वार्ड ऐसे रहे, जहां 100 से ज्यादा मतदाताओं ने चुनाव मैदान में उपलब्ध सभी प्रत्याशियों को नकार दिया।
वहीं वार्ड 72 में 98, वार्ड 40 और वार्ड 55 में 92-92, जबकि वार्ड 36 में 90 वोट NOTA के खाते में गए। इसके अलावा कई अन्य वार्डों में भी NOTA का आंकड़ा 70 से 90 के बीच रहा।
वार्ड 31 में सबसे कम NOTA
अगर सबसे कम NOTA वाले वार्डों की बात करें तो वार्ड नंबर 31 में सिर्फ 13 वोट NOTA के पक्ष में पड़े। इसके अलावा वार्ड 26 में 20, वार्ड 60 में 23 और वार्ड 10 में 26 मतदाताओं ने NOTA का विकल्प चुना।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों ने मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत लगाई। घर-घर संपर्क से लेकर बैठकों और जनसंपर्क अभियानों तक, हर प्रत्याशी ने अपने पक्ष में वोट मांगने की कोशिश की। इसके बावजूद हजारों मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं देकर NOTA को चुना।
4674 वोटों का संदेश क्या है?
NOTA का आंकड़ा किसी उम्मीदवार की जीत-हार को सीधे प्रभावित नहीं करता, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यह मतदाताओं के असंतोष या उपलब्ध विकल्पों से असहमति को दर्ज करने का माध्यम है।
ऐसे में 4674 NOTA वोट राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के सामने कई सवाल छोड़ रहे हैं। क्या मतदाताओं को मैदान में उतरे प्रत्याशी पसंद नहीं आए? क्या स्थानीय मुद्दों और अपेक्षाओं के अनुरूप उम्मीदवार सामने नहीं थे? या फिर कुछ मतदाताओं ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के प्रति अपनी नाराजगी NOTA के जरिए जाहिर की?
चुनाव परिणाम के बाद जहां राजनीतिक दल जीत और हार का विश्लेषण कर रहे हैं, वहीं NOTA का यह आंकड़ा भी चर्चा का विषय बन गया है।
