मावठ और ओलावृष्टि से बदला मौसम का मिजाज, अन्नदाता के अरमानों पर फिरा पानी

राजस्थान में कुदरत का कहर

जयपुर। राजस्थान में सक्रिय हुए ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ ने पूरे प्रदेश के मौसम तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। मरूधरा में आए इस अचानक बदलाव ने न केवल तापमान में भारी गिरावट ला दी है, बल्कि किसानों के लिए भी यह आफत की बारिश बनकर बरसी है। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के 10 से ज्यादा जिलों में शुक्रवार सुबह गरज-चमक के साथ सीजन की पहली मावठ हुई। इस दौरान सीकर और आसपास के इलाकों में हुई भारी ओलावृष्टि ने खेतों में बिछी फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है।

सुबह का आगाज होते ही जयपुर में बादलों की गड़गड़ाहट और तेज आंधी ने लोगों को चौंका दिया। सुबह करीब 5 बजे शुरू हुई बूंदाबांदी ने देखते ही देखते मूसलाधार बारिश का रूप ले लिया, जिससे सड़कों पर पानी बह निकला और ठंडी हवाओं के चलने से ठिठुरन कई गुना बढ़ गई। शेखावाटी अंचल के सीकर जिले में तो स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां करीब 15 मिनट तक लगातार चने के आकार के ओले गिरे। किसानों का कहना है कि सरसों और चने जैसी फसलों के लिए यह ओलावृष्टि किसी त्रासदी से कम नहीं है। जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे सरहदी जिलों में भी गुरुवार दोपहर से ही शुरू हुआ हल्की बारिश का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा, जिससे पूरा प्रदेश अब कड़ाके की ठंड की चपेट में है।

मौसम विभाग ने आने वाले घंटों के लिए बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी है। विभाग की ओर से प्रदेश के 14 महत्वपूर्ण जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है, जबकि 11 जिलों को ‘यलो अलर्ट’ पर रखा गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह विक्षोभ अभी पूरी तरह सक्रिय है, जिसके कारण कल से प्रदेश के बड़े हिस्से में घना कोहरा छाने और भीषण शीतलहर चलने की प्रबल संभावना है। बिजली की तेज कड़क और ओलों की मार ने राजस्थान में सर्दियों की विदाई से पहले एक बार फिर कंपकंपी बढ़ा दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आ रहा है।

Spread the love