
जयपुर। जयपुर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल पर CBSE ने अब तक की सबसे बड़ी गाज गिराई है। मासूम अमायरा सुसाइड केस में स्कूल प्रबंधन की भारी लापरवाही सामने आने के बाद बोर्ड ने स्कूल की मान्यता (Affiliation) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी भी माता-पिता का दिल दहला देने वाले हैं। पता चला है कि 9 साल की अमायरा ने मौत की छलांग लगाने से पहले आखिरी 45 मिनट में 5 बार अपनी क्लास टीचर से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन टीचर का दिल नहीं पसीजा।
बुलिंग का शिकार थी मासूम, कागजों में सिमटी सुरक्षा कमेटियां CBSE की जांच रिपोर्ट ने स्कूल के दावों की पोल खोलकर रख दी है। चौथी क्लास में पढ़ने वाली अमायरा स्कूल में लगातार बुलिंग (मानसिक प्रताड़ना) का शिकार हो रही थी। उसके माता-पिता ने डेढ़ साल में तीन बार स्कूल प्रशासन और कोऑर्डिनेटर से इसकी शिकायत की थी, लेकिन स्कूल की ‘एंटी-बुलिंग कमेटी’ सिर्फ कागजों तक सीमित रही। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि स्कूल में न तो सीसीटीवी निगरानी पर्याप्त थी और न ही ऊंची मंजिलों पर सेफ्टी नेट या रेलिंग जैसे बुनियादी सुरक्षा इंतजाम। यहाँ तक कि स्टाफ और स्टूडेंट्स के आईडी कार्ड तक अनिवार्य नहीं थे, जिससे निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ।
सबूत मिटाने की कोशिश: मौके से साफ किए खून के धब्बे इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने मौके से खून के धब्बे साफ करवा दिए थे। फोरेंसिक जांच को प्रभावित करने की इस कोशिश को बोर्ड ने अत्यंत गंभीर माना है। जांच कमेटी ने पाया कि स्कूल का काउंसलिंग सिस्टम पूरी तरह बेअसर था और चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटियां धरातल पर सक्रिय ही नहीं थीं। इन्हीं गंभीर उल्लंघनों के आधार पर CBSE ने माना कि स्कूल का माहौल बच्चों के लिए कतई सुरक्षित नहीं है।
छात्रों पर क्या होगा असर? नए एडमिशन पर लगी रोक मान्यता रद्द होने के बाद अब नीरजा मोदी स्कूल नए एडमिशन नहीं ले सकेगा। हालांकि, सत्र 2025-26 में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को राहत दी गई है, वे इसी स्कूल से परीक्षा दे सकेंगे। लेकिन 9वीं और 11वीं के छात्रों को अगले सत्र (2026-27) में पास के दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। स्कूल अब साल 2027 से पहले दोबारा मान्यता के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएगा। यह कार्रवाई जयपुर ही नहीं, बल्कि देशभर के उन नामी स्कूलों के लिए एक सख्त सबक है जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संस्थान चलाते हैं।
