सड़क पर ‘देवदूत’ बने एम्बुलेंस कर्मी, जब मौत को मात देकर एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

जोधपुर के शेरगढ़ की सड़कों पर ममता और फर्ज की एक ऐसी दास्तां लिखी गई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। 19 साल की अमिता के लिए मां बनने का सफर बेहद डरावना मोड़ ले चुका था, क्योंकि कोख में पल रहा बच्चा उल्टा था और प्रसव की जटिलता किसी खतरे से कम नहीं थी। डॉक्टर ने जब गंभीर स्थिति को देखते हुए जोधपुर रेफर किया, तो परिवार के मन में अनहोनी की आशंकाएं गहराने लगी थीं। एम्बुलेंस तेज रफ्तार से अस्पताल की ओर बढ़ रही थी, लेकिन कुदरत ने बीच रास्ते में ही अमिता की परीक्षा लेनी शुरू कर दी। प्रसव पीड़ा इतनी असहनीय हो गई कि अस्पताल तक पहुंच पाना नामुमकिन लगने लगा।

सड़क के किनारे खड़ी उस एम्बुलेंस में जब जिंदगी और मौत के बीच जंग छिड़ी, तब पायलट शैतान सिंह भाटी और ईएमटी देवराज उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। बिना समय गंवाए उन्होंने एम्बुलेंस को ही लेबर रूम में तब्दील कर दिया। बच्चे की स्थिति उल्टी होने के बावजूद, इन जांबाज स्वास्थ्य कर्मियों ने हार नहीं मानी और अपनी सूझबूझ से सुरक्षित प्रसव कराया। जैसे ही एम्बुलेंस के सन्नाटे को चीरते हुए मासूम की पहली किलकारी गूंजी, अमिता और उसके परिजनों के चेहरों पर खौफ की जगह सुकून के आंसू छलक पड़े।

आज मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन यह सुरक्षित प्रसव केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन एम्बुलेंस कर्मियों के हौसले की जीत है जिन्होंने विपरीत हालात में एक नन्ही जान को दुनिया में आने का रास्ता दिया। बालेसर अस्पताल में भर्ती अमिता का परिवार आज उन ‘वर्दी वाले फरिश्तों’ का शुक्रगुजार है, जिन्होंने अपनी तत्परता से एक मां की गोद सूनी होने से बचा ली और इस मुश्किल सफर को एक सुखद अंत दिया।

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