ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर देशभर में साइबर ठगी का बड़ा पर्दाफाश: अजमेर पुलिस ने नागौर के 3 युवकों को किया गिरफ्तार

राजस्थान में साइबर अपराधों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियानों के बीच अजमेर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अजमेर जिला पुलिस ने एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ऑनलाइन गेमिंग और इनाम जीतने का लालच देकर पूरे देश में भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहा था। इस सिलसिले में रामगंज थाना पुलिस और जिला साइबर सेल की संयुक्त टीम ने त्वरित और सघन कार्रवाई करते हुए नागौर जिले के रहने वाले तीन युवकों को गिरफ्तार किया है।

क्या था ठगी का तरीका (Modus Operandi)? यह गिरोह बहुत ही सुनियोजित और तकनीकी तरीके से काम कर रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर फर्जी ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट्स और ऐप्स का जमकर प्रचार करते थे। वे विज्ञापनों में दावा करते थे कि उनके प्लेटफार्म पर गेम खेलने से न केवल पैसा दोगुना होता है, बल्कि महंगे गैजेट्स, कार और लाखों रुपये के नकद इनाम भी जीते जा सकते हैं।

जब कोई व्यक्ति इनके झांसे में आ जाता था, तो उसे रजिस्ट्रेशन शुल्क, गेमिंग टोकन या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर एक तय रकम बैंक खातों या यूपीआई (UPI) के जरिए जमा करने को कहा जाता था। जैसे ही पीड़ित व्यक्ति के पैसे इनके खातों में ट्रांसफर होते थे, यह गिरोह तुरंत अपनी फर्जी वेबसाइट और संपर्क नंबरों को बंद कर देता था, जिससे पीड़ित का पैसा डूब जाता था।

क्या-क्या हुआ बरामद? गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे कई महंगे लैपटॉप, दर्जनों मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई बैंक खातों के एटीएम (ATM) कार्ड जब्त किए हैं। पुलिस इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोगों को और कितने करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है।

राजस्थान में साइबर क्राइम का बढ़ता जाल यह मामला कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि उस बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जो राजस्थान के अजमेर, नागौर, भरतपुर और मेवात क्षेत्रों में तेजी से फैला है। हाल ही में नागौर पुलिस द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ और ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ (Operation Mule Hunter) जैसे अभियानों में यह बात भी सामने आई है कि ये गिरोह आम लोगों से किराए पर बैंक खाते (Mule Accounts) खरीदते हैं। इसके लिए खाताधारक को 2% तक का कमीशन दिया जाता है और उन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगवाई जाती है। अजमेर में पकड़े गए इन युवकों के तार भी ऐसे ही बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की प्रबल संभावना है, जो करोड़ों रुपये के लेनदेन में शामिल हैं।

पुलिस की अपील और सतर्कता (एडवाइजरी) अजमेर पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी लुभावने ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापनों या ‘लॉटरी जीतने’ वाले संदेशों पर कतई भरोसा न करें।

  • किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड न करें।
  • सोशल मीडिया पर मिलने वाले अज्ञात लिंक पर क्लिक करके अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
  • यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होती है, तो घबराएं नहीं। तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

फिलहाल, रामगंज थाना पुलिस तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य चेहरों और ठगी के बड़े नेटवर्क का जल्द ही पर्दाफाश होगा।

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