साई तिरुपति विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह

साई तिरुपति विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह सम्पन्न

उदयपुर। उमरड़ा स्थित साई तिरुपति विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह मेवाड़ बेनक्वेट हॉल में  सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ जिसमें पिम्स के करीब 125 एम.बी.बी.एस. तथा 58 एम.डी./ एम.एस. छात्रों को डिग्री, विश्वविद्यालय के 29 छात्रों को पी.एच.डी. की उपाधि तथा स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।


समारोह का शुभारंभ राष्ट्र गीत वंदे मातरम् से हुआ। अध्यक्षता चेयरपर्सन आशीष अग्रवाल ने की। कुलपति प्रो. डॉ. प्रशांत नाहर ने अपने स्वागत उद्बोधन देते हुए सन् 2016 मे स्थापित साई तिरुपति विश्वविद्यालय की विगत एक दशक की विकास यात्रा सभी संघटक कॉलेजों की उपलब्धियों, उनकी शैक्षणिक व अन्य आधारभूत सुविधाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटलाईसेशन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स के समावेश, नवीन पाठ्यक्रमों, रिसर्च प्रोग्राम, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के तहत किए जा रहे प्रयासों, तथा दक्षिणी राजस्थान के अग्रणी पिम्स हॉस्पिटल की उपलब्धियों तथा अत्याधुनिक उपचार सेवाओं का लेखाजोखा प्रस्तुत किया।


सी. ई. ओ. श्रीमती शीतल अग्रवाल ने सभी डिग्री तथा पदक प्राप्त करने वाले छात्रों को आशीर्वचन प्रदान किए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए, शुभकामनाएं प्रेषित की। उन्होंने सभी से निस्वार्थ भावना के साथ सदैव मानवता की सेवा के लिए तत्पर रहने और एक सफल चिकित्सक बनने का आह्वान भी किया। एम. डी. नमन अग्रवाल ने भविष्य की योजनाओं के बारे मे प्रकाश डाला तथा पिम्स एवं यूनिवर्सिटी की सफलता के लिए सभी चिकित्सक, फैकल्टी मेम्बर्स तथा स्टाफ के योगदान की सराहना की। पिम्स मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. सुरेश गोयल ने सभी मेडिकल स्नातक तथा स्नातकोत्तर छात्रों को डिग्री प्रदान करने के पश्चात हिप्पोक्रैटिक शपथ दिलाने की रस्म अदा की तथा जनहित हेतु सदैव तत्परता एवं एथिक्स के साथ मानवता की सेवा करने का प्रण दिलाया।


समारोह के मुख्य अतिथि र.ना. टै. मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के प्रिन्सिपल एंड कन्ट्रोलर डॉ. राहुल जैन ने सभी को शुभकामनाओं के साथ बड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह डिग्री महज एक कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि आपके ऊपर समाज और मानवता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मेडिकल के क्षेत्र में समय के साथ अब कई चुनौतियां भी बढ़ी है। उन्हीं को ध्यान में रखते हुए आपको इस नई पारी की शुरुआत करनी है। आपको हमेशा एक बात ध्यान में रखनी है कि कोई भी मरीज या उनके परिजन अस्पताल में घूमने फिरने के लिए नहीं आते हैं। वह मरीज की बीमारी के उपचार के लिए आप पर भरोसा और विश्वास लेकर आते हैं। आपको उनकी मानसिक और आर्थिक स्थिति का ख्याल करते हुए ही उनका इलाज करना है क्योंकि आप मरीज और उनके परिजनों की उम्मीद और भरोसा होते हैं। जब कभी भी यह भरोसा और उम्मीद डगमगाने लगती है तो स्वाभाविक तौर पर परिजन कभी-कभी गुस्सा भी हो जाते हैं और गुस्सा हिंसा का कारण भी बन जाता है। ऐसे में आप सभी को धैर्य और संतोष से कार्य करना होगा। आप मरीज को क्या दवाइयां दे रहे हैं, या कैसा इलाज कर रहे हैं इससे मरीज और उनके परिजनों को कोई लेना-देना नहीं होता है क्योंकि यह तो आपका काम है। मरीज और उसके परिजन आपको आपके व्यवहार और आपकी सेवाओं के कारण याद रखेंगे। कोई भी मरीज और परिजन आपके इलाज और सेवाओं से संतुष्ट होकर आपको दुआएं देकर जाता है, यही आपके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।


रजिस्ट्रार डॉ देवेन्द्र जैन ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, बोम तथा ऐकडेमिक काउन्सल के सदस्यों, विश्वविद्यालय के सभी संघटक कॉलेजों के डीन, फैकल्टी मेम्बर्स, स्टाफ छात्रों, परिजनों तथा आयोजन समिति के सदस्यों को समारोह के सफलता पूर्वक सम्पन्न होने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. नरेंद्र सिंह गोयल ने किया।

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