जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव का प्रचार जोर पकड़ने के साथ ही प्रत्याशियों के लिए चुनावी नियमों का पालन करना भी चुनौती बन गया है। सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए पोस्टर, बैनर और होर्डिंग नहीं हटाना प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है। निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च और प्रचार सामग्री को लेकर नियमों का पालन सख्ती से कराने के निर्देश दिए हैं।
सार्वजनिक स्थलों पर लगी प्रचार सामग्री का खर्च संबंधित प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ा जा सकता है। निर्धारित खर्च सीमा से अधिक खर्च सामने आने पर प्रत्याशी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। चुनाव परिणाम के बाद प्रत्याशियों को 15 दिन के भीतर चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा भी देना अनिवार्य है।
सवा लाख से ज्यादा पोस्टर-बैनर हटाए गए
निकाय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रदेशभर में अवैध होर्डिंग, पोस्टर और बैनर हटाने का अभियान शुरू किया गया। इसके बावजूद कई जगह सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार सामग्री लगाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सड़कों, गलियों, चौराहों, बिजली के खंभों और सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री लगाना नियमों के दायरे में आता है। राजस्थान में संपत्ति विरूपण और चुनाव प्रचार से जुड़े नियमों के तहत ऐसी सामग्री पर कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रत्याशियों के लिए खर्च की सीमा तय
राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा तय की है।
- नगर निगम पार्षद: 3.50 लाख रुपए
- नगर परिषद पार्षद: 2.50 लाख रुपए
- नगरपालिका पार्षद: 1.50 लाख रुपए
पोस्टर-बैनर, जनसभा, रैली, वाहन, प्रचार सामग्री और जनसंपर्क समेत चुनाव प्रचार से जुड़े खर्च इसी सीमा में शामिल होंगे।
नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे तो कार्रवाई
आयोग ने चुनाव अधिकारियों को आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाने पर नोटिस और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
38,891 प्रत्याशी मैदान में
नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्थान के 10,245 वार्डों में 38,891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कुल 69,811 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से 17,137 नामांकन खारिज हुए और 10,112 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए।
अब हजारों प्रत्याशियों के सामने चुनाव प्रचार के साथ-साथ खर्च की सीमा और आचार संहिता का पालन करने की चुनौती है। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही भी प्रत्याशी के लिए कानूनी और चुनावी परेशानी खड़ी कर सकती है।
