देवास बांधों से आज पिछोला-फतहसागर में छोड़ा जाएगा पानी

पेयजल संकट टालने की तैयारी, सीसारमा नदी और नांदेश्वर टैंक के बहाव क्षेत्र में बढ़ेगा जलप्रवाह; प्रशासन ने लोगों से दूर रहने की अपील की

उदयपुर। इस मानसून सीजन में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण पिछोला और फतहसागर झील में पानी की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। शहर की पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने देवास प्रथम और देवास द्वितीय परियोजना से पानी झीलों में पहुंचाने का फैसला लिया है। यह पानी आकोदड़ा और मादड़ी बांध से अपवर्तित किया जाएगा। 17 सितंबर 2026 को पानी छोड़ने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।

पेयजल संकट से पहले बनाया गया प्लान

पिछोला और फतहसागर में जलस्तर कम रहने के कारण भविष्य में पेयजल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे पहले 9 सितंबर की रिपोर्ट में भी फतहसागर का जलस्तर करीब 6 फीट और पिछोला का करीब 7.1 फीट बताया गया था, जबकि दोनों झीलों की भराव क्षमता क्रमशः 13 और 11 फीट है।

इसी स्थिति को देखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल संसाधन विभाग के बीच चर्चा के बाद देवास परियोजना के जलाशयों का पानी झीलों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। पानी को निर्धारित तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से पिछोला और फतहसागर की ओर मोड़ा जाएगा।

सीसारमा नदी के आसपास अलर्ट

पानी छोड़े जाने के दौरान सीसारमा नदी और नांदेश्वर टैंक के बहाव क्षेत्र में पानी का प्रवाह बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने नदी, नालों और बहाव वाले क्षेत्रों से लोगों को दूर रहने की अपील की है। लोगों से अपने मवेशियों को भी इन क्षेत्रों में नहीं ले जाने को कहा गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।

झीलों में पानी आने से पर्यटन को भी उम्मीद

उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से जुड़ी हुई है। पिछोला और फतहसागर में पानी का स्तर बढ़ने से पर्यटन गतिविधियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। झीलों की स्थिति का असर होटल, बोटिंग और स्थानीय पर्यटन कारोबार पर भी पड़ता है। आगामी त्योहारी सीजन और दीपावली के बाद गुजरात सहित अन्य राज्यों से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना के बीच झीलों में पानी पहुंचाना पर्यटन कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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