उपचुनाव का ‘पॉलिटिकल सस्पेंस’, मोरपाल सुमन की चिट्ठी ने खोली संगठन की कलई, अपनों ने ही रोका विजय रथ!

अंता विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए अभी जुम्मा-जुम्मा चार दिन भी नहीं बीते कि बारां जिले की भाजपा में छिपी ज्वालामुखी जैसी कलह अब बीच सड़क पर आ गई है। भाजपा प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन के नाम से वायरल हुए एक शिकायती पत्र ने जिले की सियासत में जबरदस्त धमाका कर दिया है। इस चिट्ठी में हार की जो कड़वी हकीकत बयां की गई है, उसने संगठन के उन बड़े सूरमाओं को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है जिनके कंधों पर पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी थी। वायरल पत्र में साफ तौर पर यह दावा किया गया है कि अंता में भाजपा की शिकस्त कांग्रेस की मजबूती से नहीं, बल्कि अपनों की गद्दारी और भीतरघात के कारण हुई है।

इस कथित पत्र ने उन ‘सियासी विभीषणों’ की लंबी फेहरिस्त उजागर कर दी है जिन्होंने चुनाव के दौरान पर्दे के पीछे से खेल किया। चिट्ठी में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के करीबी मनोज शर्मा से लेकर पूर्व विधायक हेमराज मीणा और कई पूर्व जिलाध्यक्षों के नाम शामिल किए गए हैं। आरोप है कि इन प्रभावशाली नेताओं के साथ-साथ अंता प्रधान प्रखर कौशल, उपप्रधान धर्मेंद्र यादव, चेयरमैन रामेश्वर खंडेलवाल और किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष मुकेश धाकड़ जैसे दिग्गजों ने पार्टी के पक्ष में काम करने के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी की राह आसान की। पत्र में यहां तक कहा गया है कि टिकट मिलने में हुई देरी और दावेदारों की आपसी खींचतान ने भाजपा के विजय रथ के पहिये जाम कर दिए।

इस पूरे ड्रामे में सबसे बड़ा सस्पेंस तब पैदा हुआ जब खुद मोरपाल सुमन ने सार्वजनिक रूप से इस चिट्ठी से पल्ला झाड़ते हुए इसे लिखने की बात से इनकार कर दिया। हालांकि, मामला तब और पेचीदा हो गया जब भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार ने व्हाट्सएप पर यह पत्र मिलने की पुष्टि की और इसे अनुशासनहीनता की रिपोर्ट के साथ प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजने की बात कही। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष तक भेजी गई इस प्रतिलिपि ने बारां से लेकर जयपुर और दिल्ली तक हलचल मचा दी है। अब गलियारों में चर्चा इस बात की है कि यह वाकई मोरपाल सुमन का दर्द है या फिर किसी ने जलती आग में घी डालने के लिए यह ‘लेटर बम’ प्लांट किया है, लेकिन इस घटना ने यह तो साफ कर दिया है कि भाजपा के अंदर की खाई अब पाटना मुश्किल है।

Spread the love