भामाशाह डॉ. मनमोहन उपाध्याय ने झाड़ोल के स्कूली बच्चों को बांटे स्वेटर, ग्रामीणों ने कहा- ‘समाज के सच्चे कर्णधार’

17 साल से जारी है सेवा का सिलसिला

रायपुर मोखुंदा। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच मानवता की सेवा का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी और प्रख्यात भामाशाह डॉ. मनमोहन उपाध्याय ने अपनी 17 वर्षों की अटूट परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी ग्राम पंचायत झाड़ोल स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, भीलों का खेड़ा के नन्हे-मुन्ने बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए गर्म स्वेटर वितरित किए। स्कूल के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्वेटर पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

दो पंचायतों के लिए बने ‘संकटमोचक’ डॉ. मनमोहन उपाध्याय क्षेत्र में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मोखुंदा और झाड़ोल दोनों पंचायतों में पशु सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। पिछले 17 वर्षों से वे पशुओं की बीमारियों और सेवा के लिए तन-मन-धन से समर्पित हैं। उनकी इसी कार्यशैली और सेवा भावना के कारण ग्रामीण उन्हें दोनों पंचायतों का ‘कर्णधार’ मानते हैं। पशु सेवा के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में अभावग्रस्त बच्चों की मदद करना उनका मुख्य ध्येय बन गया है।

सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में हुआ अभिनंदन कार्यक्रम में संस्था प्रधान गालव देव जोशी ने भामाशाह का स्वागत करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के सहयोग से बच्चों का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने डॉ. उपाध्याय को माला और साफा पहनाकर उनका बहुमान किया। मीडिया प्रभारी मोहम्मद अशरफ रंगरेज ने बताया कि इस अवसर पर सरपंच रोहित सोनी, गणपत जी कुकड़ा, कैलाश स्वर्णकार, रमेश सिंह बड़वा, वार्ड पंच राजेश तिवारी, ओम सिंह चुंडावत, रघु सालवी और किशन सिंह डोडिया सहित झाड़ोल और मोखुंदा के सैकड़ों ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित थे।

दुआओं के साथ हुआ समापन स्वेटर वितरण कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने भामाशाह के इस महादान की सराहना की। सामूहिक रूप से ईश्वर से प्रार्थना की गई कि समाज को ऐसे और भी भामाशाह मिलें जो अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंदों के उत्थान में लगाएं। संस्था प्रधान और विद्यालय परिवार ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. उपाध्याय की यह निरंतर सेवा बच्चों के लिए भविष्य में प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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