
उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 30 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के आरोप में करीब ढाई महीने तक यहां बंद रहे फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल के भीतर बिताए अपने दर्दनाक दिनों का खुलासा किया है।
भट्ट के अनुसार, जेल में कैद के दौरान जनवरी की कड़ाके की ठंड में उन्हें तेज बुखार हो गया। हालत ऐसी थी कि चार कंबल ओढ़ने के बावजूद ठंड नहीं रुक रही थी। बैरक में मौजूद अन्य कैदियों ने उनकी मदद की, लेकिन इलाज के नाम पर उन्हें राहत नहीं मिल सकी।
उन्होंने बताया कि जब वे जेल अस्पताल पहुंचे तो वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं था और सिर्फ ऑक्सीजन चेक कर उन्हें सामान्य बता दिया गया। जबकि वे पहले से एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें तेज बुखार जानलेवा हो सकता है।
विक्रम भट्ट ने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें बाहर अस्पताल रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें ले जाने में लगातार देरी होती रही। कभी पुलिस वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रही तो कभी अन्य कारणों से मामला टलता गया। इस दौरान वे कई दिनों तक बैरक में ही दर्द और बुखार से जूझते रहे।

हालात बिगड़ने पर उन्होंने जेल में ही भगवान से प्रार्थना शुरू कर दी। उन्होंने भावुक होकर लिखा कि वे रोज देवी की तस्वीर के सामने बैठकर कहते थे—“मैं यहां नहीं मरना चाहता, मेरे परिवार को मेरी जरूरत है।” धीरे-धीरे उनकी तबीयत में सुधार होने लगा।
उन्होंने जेल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत के करीब 15 दिन बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक वे खुद ही ठीक हो चुके थे। उन्होंने तंज करते हुए कहा—“आप 15 दिन देर से आए, शायद मेरे भूत को देखने।”
यह पूरा मामला उदयपुर के डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा दर्ज कराई गई 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR से जुड़ा है। आरोप है कि फिल्म निर्माण के नाम पर बड़े मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपए का लेनदेन किया गया।
फिलहाल मामला जांच में है, लेकिन उदयपुर सेंट्रल जेल से जुड़े इस खुलासे ने जेल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
