उदयपुर। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर उदयपुर में श्रद्धा और भक्ति के माहौल के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। शहर के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमाओं को लेकर विसर्जन स्थलों पर पहुंचे और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई दी। इस दौरान कई श्रद्धालु भावुक नजर आए।
गणेशोत्सव के दौरान घरों और विभिन्न स्थानों पर विराजित गणपति प्रतिमाओं को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के लिए लाया गया। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर गणपति बप्पा से सुख-समृद्धि की कामना की और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।
उदयपुर की झीलों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से झीलों के आसपास कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाए गए। छोटी गणेश प्रतिमाओं को इन कुंडों में सांकेतिक रूप से डुबकी लगाकर वापस निकाल लिया गया, जिससे प्रतिमाओं का सीधे झीलों में विसर्जन न हो।
सांकेतिक विसर्जन के बाद गणेश प्रतिमाओं को मादड़ी फायर स्टेशन ले जाया गया, जहां उनके निस्तारण की प्रक्रिया की गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ शहर की झीलों और पर्यावरण को सुरक्षित रखना रहा।
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ विदाई की भावुकता भी दिखाई दी। किसी ने हाथ जोड़कर बप्पा से अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना की, तो किसी ने जयकारों के साथ उन्हें विदा किया।
