वेनेजुएला-ईरान के बाद अब ट्रम्प के निशाने पर क्यूबा: बोले- ‘किसी भी तरह इसे हासिल करके रहूंगा’

हवाना/वॉशिंगटन। दुनिया के नक्शे पर एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुले तौर पर क्यूबा को अपने नियंत्रण में लेने का इरादा जाहिर कर दिया है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रम्प ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि वह क्यूबा को ‘हासिल’ करना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उसे आजाद कराना पड़े या सीधे अपने कब्जे में लेना पड़े। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रम्प के इस बयान को ऐतिहासिक रूप से चौंकाने वाला बताया है, क्योंकि बीते 65 सालों के तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तरह खुलेआम कब्जे की बात नहीं की थी।

घेराबंदी का असर: अंधेरे में डूबा क्यूबा, 35 डॉलर पहुंचा पेट्रोल

ट्रम्प प्रशासन की रणनीति का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। अमेरिका ने जनवरी से ही क्यूबा की तेल सप्लाई पर लगभग पूरी तरह पहरा बैठा दिया है। आलम यह है कि 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ा तेल टैंकर नहीं पहुंचा है, जिससे पूरा देश ब्लैकआउट की चपेट में है। राजधानी हवाना का 70 प्रतिशत हिस्सा अंधेरे में डूबा है, अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं और ब्लैक मार्केट में पेट्रोल की कीमतें 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं। ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में भी स्पष्ट किया था कि ईरान के बाद अब उनकी प्राथमिकता सूची में क्यूबा ही है।

सत्ता परिवर्तन और निवेश का डबल गेम

ट्रम्प की इस आक्रामकता के पीछे सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि बड़ा कारोबारी हित भी छिपा नजर आता है। जानकारों का कहना है कि ट्रम्प क्यूबा को निवेश के एक ‘सुंदर द्वीप’ के रूप में देखते हैं, जहां वह गोल्फ कोर्स और अन्य प्रोजेक्ट्स की संभावनाएं तलाश रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका का दबाव है कि राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल अपने पद से हटें। हालांकि, क्यूबा सरकार ने भी घुटने टेकने के बजाय बातचीत के संकेत दिए हैं और विदेशी निवेश के लिए अपनी अर्थव्यवस्था खोलने का ऐलान किया है, लेकिन बिजली गुल होने के कारण यह घोषणा टीवी के बजाय रेडियो पर करनी पड़ी।

रूस की एंट्री से बढ़ सकता है तनाव

इस पूरे घटनाक्रम में रूस की एंट्री ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। मॉस्को ने संकेत दिए हैं कि वह मुश्किल वक्त में क्यूबा का साथ देगा। गौरतलब है कि 1959 में फिदेल कास्त्रो की क्रांति के बाद से ही क्यूबा और अमेरिका के बीच कम्युनिस्ट विचारधारा और संपत्ति जब्ती को लेकर ठनी हुई है। अब ट्रम्प के ताजा बयानों और आर्थिक नाकेबंदी ने इस 65 साल पुरानी दुश्मनी को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।

Spread the love