हार से जीत की अनूठी कहानी: दो बार मौत को गले लगाने की कोशिश की, अब 71 हजार किमी साइकिल चलाकर बांट रहे जिंदगी

उदयपुर। जब हौसले पस्त हो जाएं और चारों तरफ अंधेरा घिर जाए, तो इंसान अक्सर जिंदगी से मुंह मोड़ लेता है। लेकिन कोलकाता के संजय बिश्वास की दास्तां हारकर जीतने की वो मिसाल है, जो आज देश के हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की मशाल बन चुकी है। कभी तीन कैफे डूबने के गम में खुदकुशी की कोशिश करने वाले संजय आज अपनी साइकिल पर सवार होकर पूरे भारत में यह संदेश फैला रहे हैं कि ‘आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।’ लेक सिटी उदयपुर पहुंचे संजय ने सहेलियों की बाड़ी स्थित पंडित जी की लेमन टी पर स्थानीय लोगों से रूबरू होकर अपने संघर्ष और आत्मबल की प्रेरक कहानी साझा की।

संजय के जीवन में मुश्किलों का पहाड़ तब टूटा जब कोरोना महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश के अमेठी में उनके तीन चलते हुए कैफे बंद हो गए। भारी आर्थिक घाटे और मानसिक तनाव ने उन्हें इस कदर तोड़ा कि उन्होंने दो बार मौत को गले लगाने का प्रयास किया, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। मनोवैज्ञानिकों की सलाह और खुद को अकेलेपन से बाहर निकालने की जिद ने उन्हें साइकिल थमा दी। जो साइकिल शुरू में एक थेरेपी थी, वह धीरे-धीरे उनके जीवन का मिशन बन गई। 36 वर्षीय संजय अब तक देश के 26 राज्यों की दो-दो बार यात्रा कर चुके हैं और नेपाल, भूटान व बांग्लादेश तक अपनी साइकिल के पैडल मार चुके हैं।

हावड़ा से ग्रेजुएट संजय की साइकिल पर एक ही नारा प्रमुखता से लिखा है— ‘आत्महत्या न करें, जीवन अनमोल है।’ राजस्थान के भरतपुर से 16 नवंबर को प्रवेश करने के बाद वे प्रदेश के विभिन्न शहरों से होते हुए अब मेवाड़ की धरा पर पहुंचे हैं। वे स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि अवसाद के क्षणों में अपनों का साथ न छोड़ें। उनकी इस निस्वार्थ सेवा और जज्बे की सराहना अभिनेता सोनू सूद भी तीन बार मुलाकात कर चुके हैं।

संजय का मानना है कि उनकी 71 हजार किलोमीटर की यह लंबी यात्रा तब सफल होगी, जब उनकी कहानी सुनकर कोई एक व्यक्ति भी मौत का इरादा त्याग कर दोबारा उठ खड़ा होगा। उदयपुर के युवाओं के लिए संजय की यह यात्रा एक बड़ा सबक है कि कारोबार और पैसा फिर कमाया जा सकता है, लेकिन यह अनमोल जीवन दोबारा नहीं मिलता। संघर्ष से शिखर तक का उनका यह सफर आज सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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