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झुंझुनूं (रामपुरा)। रोजी-रोटी की तलाश में दुबई गए सुमेर सिंह मीणा की लकड़ी के ताबूत में वापसी ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। तीन महीने से लापता चल रहे सुमेर की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, पत्नी गश खाकर गिर पड़ी, मां बेहोश हो गई और बेटी रेणु ताबूत से लिपटकर बिलख पड़ी—“पापा को नींद में मार डाला… किसने मारा?”
तीन महीने से लापता, दस दिन पहले मौत की खबर
रामपुरा गांव निवासी सुमेर सिंह मीणा (40) ने अगस्त 2024 में झुंझुनूं से दुबई की फ्लाइट पकड़ी थी। जयपुर के एजेंट कमलेश सोनी को 1 लाख रुपए देकर वह ‘अग्निश’ नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने गया था। शुरुआत में सब ठीक चला, लेकिन फरवरी के बाद सबकुछ बदल गया।

मार्च 2025 में अंतिम बार परिवार से बात करते हुए सुमेर ने कहा था—”कंपनी पैसा नहीं दे रही, नौकरी छोड़ रहा हूं। परेशान हूं, समझ नहीं आ रहा क्या करूं।” इसके बाद उसका फोन बंद हो गया।
कंपनी ने बताया ‘मिसिंग’, फिर कहा- ट्रक ने कुचल दिया
मार्च के बाद से सुमेर का कोई अता-पता नहीं था। 10 दिन पहले दुबई पुलिस से सूचना आई कि सुमेर की लाश एक कंस्ट्रक्शन साइट पर मिली है। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि सुमेर सो रहा था, तभी एक ट्रक ने उसे कुचल दिया।
शव लाने में भी आए पाले 1.75 लाख, समाजसेवी ने की मदद
शव को भारत लाने के लिए दुबई की एजेंसी ने 1.75 लाख रुपए की मांग की। परिजन हताश थे। ऐसे में चूरू के एक समाजसेवी के माध्यम से अमेरिका में बसे प्रेम भंडारी (राना अध्यक्ष) ने मदद का हाथ बढ़ाया। भारतीय दूतावास और प्रशासन के सहयोग से शव को रामपुरा लाया गया।
एजेंट पर उठे सवाल, न डॉक्यूमेंट दिए, न सही जानकारी
परिवार का आरोप है कि एजेंट कमलेश सोनी ने ना पूरी जानकारी दी, ना कोई अनुबंध करवाया। सुमेर ने कई जगह काम बदलने की कोशिश की, लेकिन मजबूरी में भटकता रहा। न रहने का ठिकाना था, न खाने का इंतज़ाम।
सरपंच बोले- विदेश भेजने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही
गांव के सरपंच धर्मपाल जांगिड़ ने कहा कि सरकार को एजेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा और स्थायी सहायता मिलनी चाहिए।
परिवार टूटा, कर्ज चुकाने की चिंता
सुमेर की बेटी रेणु ने 12वीं पास की है, लेकिन अब आगे की पढ़ाई पर संकट है। बेटा प्रदीप बोला—”पापा ने हमें पढ़ाने के लिए खुद मजदूरी की, अब हम अकेले हो गए हैं।” परिवार पर अब भी गिरधारी मूरोत का लिया हुआ कर्ज बकाया है।
गांव में मातम, हर आंख नम
गांव के ग्रामीण जगपाल ने बताया कि सुमेर पूरे गांव का मददगार था। अब गांव में लोग खुद आर्थिक मदद जुटा रहे हैं। कोई राशन ला रहा है, कोई रुपये दे रहा है।
RANA अध्यक्ष ने मांगी निष्पक्ष जांच
प्रेम भंडारी ने विदेश मंत्रालय से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह महज हादसा नहीं लगता। उन्होंने एजेंट द्वारा लिए गए ₹1 लाख परिवार को लौटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
