उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग तथा सूचना जनसंपर्क निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में सूचना केंद्र सभागार में “डिजिटल मीडिया के दौर में जनसंपर्क और पत्रकारिता का बदलता स्वरूप” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक गौरीकांत शर्मा ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने जनसंपर्क और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों को मौलिक रूप से बदल दिया है। अब सूचना का प्रसार पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट्स और मोबाइल एप्लीकेशनों के माध्यम से जनसंपर्क अधिकारी और पत्रकार सीधे जनता तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने बल दिया कि डिजिटल युग में पारदर्शिता, त्वरित प्रतिक्रिया और तथ्यों की सटीकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शर्मा ने चेतावनी दी कि अफवाहों और गलत सूचनाओं के दौर में जनसंपर्क अधिकारियों तथा पत्रकारों दोनों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे तथ्यों की जांच करके ही सूचनाएं प्रसारित करें।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. कुंजन आचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन साथ ही कई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। अब कोई भी व्यक्ति स्मार्टफोन के माध्यम से पत्रकार बन सकता है, जिससे समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे डिजिटल उपकरणों का कुशलतापूर्वक उपयोग करें, लेकिन मूल पत्रकारिता मूल्यों जैसे सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित को कभी न भूलें। डा. आचार्य ने कहा कि जनसंपर्क और पत्रकारिता के बीच का संबंध अब और अधिक जटिल हो गया है। दोनों क्षेत्रों को एक-दूसरे के साथ तालमेल बैठाकर काम करना होगा ताकि सही सूचनाएं जनता तक पहुंचे।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी विपुल शर्मा, सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी विनय सोमपुरा तथा जयेश पंड्या ने जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। तीनों वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि विभाग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है और विभिन्न योजनाओं की जानकारी सोशल मीडिया, वेबसाइट तथा व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाई जा रही है साथ ही डिजिटल माध्यमों के उपयोग से सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ी है और जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासन के बीच संवाद भी सहज हुआ है।
वरिष्ठ पत्रकार विपिन गांधी, मुकेश हिंगड़, लकी जैन और सतीश शर्मा ने फील्ड पत्रकारिता और रिपोर्टिंग के अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले समाचारों का प्रसार सीमित माध्यमों से होता था, लेकिन आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचार मिनटों में पूरे विश्व में फैल जाते हैं। उन्होंने युवा पत्रकारों को सलाह दी कि वे डिजिटल मीडिया के लाभों का उपयोग करें, लेकिन फेक न्यूज और क्लिकबेट से बचें। अनुभवों के आधार पर उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में पत्रकार को न केवल लिखना आना चाहिए, बल्कि वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक्स और सोशल मीडिया मैनेजमेंट जैसे कौशल भी सीखने चाहिए।
खुले सत्र में छात्रों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। कौमुदी मोहले, कल्याणी जैन, प्रिया सुथार, सेजल जैन, जिज्ञासा भारद्वाज, कृतिका सिंह, नकुल कुमार मीणा, सूर्यांशी सिंह राव, अंजलि दगदी, सुहाना शेख, जसोदा मेघवाल, झिलमिल मेहता, महेंद्र सिंह, युवराज टांक, राजनंदनी मेघवाल, परी शर्मा और नरेंद्र सिंह ने अपने विचार रखे। छात्रों ने डिजिटल मीडिया में रोजगार के अवसरों, नैतिक चुनौतियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
गोष्ठी का संचालन डा. भारत भूषण ओझा ने और धन्यवाद ज्ञापन युगल किशोर यादव ने किया।
“गलत सूचनाओं के दौर में पत्रकारों और जनसंपर्क अधिकारियों की जिम्मेदारियाँ बढी”
