
जयपुर। राजस्थान के वाहन मालिकों के लिए इन दिनों मोबाइल पर आने वाला एक ‘मैसेज’ डर का सबब बन गया है। मामला किसी ऑनलाइन ठगी का नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ रही उन ‘भूतिया’ गाड़ियों का है जो दूसरे के नंबर की फर्जी प्लेट लगाकर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि असली मालिक की गाड़ी घर के गैराज या किसी दूसरे राज्य में खड़ी होती है, लेकिन उसका टोल और ट्रैफिक चालान सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी अन्य शहर में कट रहा होता है।
क्या है यह ‘नंबर प्लेट क्लोनिंग’ का खेल?
दरअसल, यह शातिर अपराधियों और कुछ भ्रष्ट वाहन चालकों का एक नया तरीका है। ये लोग सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों, पार्किंग या सोशल मीडिया पर डाली गई फोटो से वैध नंबर चुरा लेते हैं। इसके बाद उस नंबर की हूबहू डुप्लीकेट (क्लोन) प्लेट तैयार की जाती है। जब ये फर्जी नंबर वाली गाड़ियां हाईवे से गुजरती हैं, तो फास्टैग (FASTag) और ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे इन्हें असली वाहन समझ लेते हैं। नतीजा यह होता है कि टोल का पैसा और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का जुर्माना असली मालिक के खाते से कट जाता है।
केस स्टडी: जब बेगुनाह मालिकों को झेलनी पड़ी मार
- केस 1: कोटपूतली के सुगराम का ट्रेलर 18 अप्रैल को गुजरात के वापी में खड़ा था, लेकिन उनके पास कोटपूतली में लेन तोड़ने का चालान पहुंच गया। जांच में पता चला कि उनके नंबर का इस्तेमाल एक लोडिंग कैंपर कर रहा था।
- केस 2: 3 दिसंबर को एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रेलर ऑफिस के बाहर खड़ा था, लेकिन हरियाणा में उसका चालान कट गया। फोटो चेक करने पर पता चला कि ट्रेलर का नंबर एक पिकअप गाड़ी पर लगा हुआ था।
हर दिन मिल रही हैं 20-30 शिकायतें ट्रांसपोर्ट संगठन राजस्थान के अनुसार, यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। रोजाना दर्जनों ट्रक मालिक इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उनकी गाड़ियां हरियाणा या पंजाब में हैं, जबकि चालान अजमेर या दिल्ली रोड पर कट रहे हैं। सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि यदि मालिक यह ‘फर्जी चालान’ नहीं भरता, तो परिवहन विभाग उसकी गाड़ी को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर देता है, जिससे उसका पूरा कारोबार ठप हो सकता है।
सिस्टम की कमियां और तस्करों का फायदा
यह धांधली उन रास्तों पर सबसे ज्यादा हो रही है जहाँ ई-चालान और स्मार्ट कैमरे लगे हैं, जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे। अपराधी जानते हैं कि इन रास्तों पर पुलिस फिजिकल चेकिंग कम करती है और सारा काम कैमरों के भरोसे है। वे इसका फायदा उठाकर न केवल टोल बचाते हैं, बल्कि अवैध गतिविधियों में भी इन फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करते हैं।
समाधान की राह: विशेषज्ञों की राय
जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग को पत्र लिखा है और सभी जिला एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इस समस्या के दो प्रमुख समाधान हैं:
- HSRP (हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट): अधिकांश गड़बड़ी उन्हीं वाहनों में हो रही है जहाँ हाई सिक्योरिटी प्लेट नहीं लगी है। इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
- क्रॉस-वेरिफिकेशन: टोल प्लाजा पर केवल नंबर प्लेट नहीं, बल्कि फास्टैग आईडी और वाहन के प्रकार (Category) का मिलान होना चाहिए। यदि नंबर ट्रक का है और गाड़ी पिकअप है, तो सिस्टम को तुरंत अलर्ट देना चाहिए।
सावधानी ही बचाव है
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में FIR दर्ज कराएं और परिवहन विभाग को सबूतों (जैसे गाड़ी की लोकेशन या जीपीएस डेटा) के साथ सूचित करें, ताकि भविष्य में होने वाली किसी बड़ी आपराधिक घटना में आपका नाम न आए।
