
सीकर/रींगस। खाटू के श्याम बाबा के दर पर शीश नवाने आने वाले भक्तों के साथ मारपीट और बदसलूकी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। व्यापारियों और वाहन चालकों के बाद अब खुद रींगस पुलिस कठघरे में खड़ी नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से आए एक दिव्यांग श्याम भक्त ने पुलिसकर्मियों पर न केवल अभद्र व्यवहार करने, बल्कि थाने के भीतर मारपीट करने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। जहां एक ओर श्रद्धालु इस घटना से आहत और आक्रोशित हैं, वहीं पुलिस प्रशासन इसे महज एक कानूनी प्रक्रिया बताकर आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
भक्ति और विवाद का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब कानपुर निवासी दिव्यांग राजीव कुमार अपने साथी विपिन शुक्ला के साथ राजस्थान रोडवेज की बस में सवार होकर रींगस से खाटूधाम की ओर जा रहे थे। राजीव का आरोप है कि बस कंडक्टर ने समय पर टिकट नहीं दिया और इसी बीच रोडवेज की फ्लाइंग टीम ने जांच के लिए बस रोक ली। बिना टिकट पाए जाने पर जब फ्लाइंग टीम ने उन पर 300 रुपये का जुर्माना लगाया, तो विवाद बढ़ गया। यह बहस इतनी तीखी हो गई कि फ्लाइंग टीम दोनों भक्तों को पकड़कर रींगस थाने ले आई। भक्तों का आरोप है कि थाने की दहलीज पर उनकी दिव्यांगता का भी लिहाज नहीं किया गया और खाकी के रसूख में उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।
इस घटना के बाद खाटू आने वाले श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर आस्था के केंद्रों पर भक्तों के साथ इसी तरह का व्यवहार होता रहा, तो खाटू और रींगस की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। दूसरी तरफ, थाने में तैनात संतरी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भक्तों ने केवल समझाइश के बाद जुर्माना भरा है और पुलिस ने हाथ तक नहीं लगाया। हालांकि, रींगस थाना प्रभारी सुरेश कुमार ने मामले में अनभिज्ञता जताते हुए जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या बाबा के द्वार पर न्याय की आस लेकर आने वाले किसी दिव्यांग के साथ पुलिस का ऐसा कठोर रवैया उचित है?
