
पल पल @ महावीर व्यास
राजसमंद। नगर परिषद के धोइंदा निवासी फाइनेंस व्यापारी हरीश जोशी की हत्या के विरोध में बुधवार को राजसमंद शहर छावनी में तब्दील नजर आया। हत्याकांड से आक्रोशित सर्व समाज के हजारों लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिनभर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि कांकरोली पुलिस समय रहते कार्रवाई करती और संदिग्धों से कड़ी पूछताछ करती, तो हरीश की जान बचाई जा सकती थी। तनावपूर्ण माहौल के बीच युवाओं ने 100 फीट रोड पर टायर जलाकर विरोध जताया और बाजार बंद करवाए।
तीन दौर की वार्ता के बाद बनी सहमति

आक्रोशित भीड़ और प्रशासन के बीच तीन दौर की लंबी वार्ता चली। दो दौर की वार्ता विफल होने के बाद मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और एसपी ममता गुप्ता से मुलाकात की। आखिरकार प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिलने पर मामला शांत हुआ। समझौते के तहत हत्या की जांच एएसपी महेंद्र पारीक को सौंपी गई है और एक परिजन को संविदा पर नौकरी देने तथा नियमानुसार सरकारी सहायता का आश्वासन दिया गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

परिजनों ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, हरीश जोशी 30 दिसंबर को घर से निकला था और 31 दिसंबर को गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। 3 जनवरी को पुलिस ने आरोपियों को थाने बुलाया, लेकिन पूछताछ कर छोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि उसी समय अगर पुलिस सख्ती दिखाती, तो आरोपियों की निशानदेही पर हरीश को जिंदा बरामद किया जा सकता था। पुलिस की इसी ‘नरमी’ का फायदा उठाकर आरोपियों ने हरीश की हत्या कर शव उदयपुर के घासा थाना क्षेत्र के एक कुएं में फेंक दिया, जो 6 जनवरी को बरामद हुआ।
10 लाख रुपए के लिए रची मौत की साजिश
एसपी ममता गुप्ता ने बताया कि इस मामले में मुख्य आरोपी जसवंत सिंह और उसके दो साथियों गजेंद्र सिंह व निर्भय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हरीश ने जसवंत को 10 लाख रुपए उधार दिए थे, जिसके बदले में गारंटी के तौर पर चेक और स्टांप लिए थे। रुपए वापस देने के बहाने बुलाकर आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर हत्या की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
