बांग्लादेश में हैवानियत की हदें पार, हिंदू विधवा से गैंगरेप के बाद पेड़ से बांधकर पीटा, बाल काटे और बनाया वीडियो, 18 दिन में 4 हिंदुओं का कत्ल!

ढाका/झेनाइदह। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और प्रताड़ना का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। झेनाइदह जिले के कालीगंज इलाके में एक 44 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और अमानवीय व्यवहार की रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। आरोपियों ने न केवल महिला की अस्मत लूटी, बल्कि दरिंदगी के बाद उसे और उसके रिश्तेदारों को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा, महिला के बाल काट दिए और इस पूरी शर्मनाक घटना का मोबाइल से वीडियो भी बनाया। पीड़ित महिला ने सोमवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने हसन नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी शाहीन अब भी फरार है।

वारदात की पृष्ठभूमि जमीन विवाद और जबरन वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। पीड़ित महिला ने करीब दो साल पहले शाहीन के भाई से जमीन खरीदी थी, जिसके बाद से ही शाहीन उसे लगातार डरा-धमकाकर पैसों की मांग कर रहा था। शनिवार शाम जब महिला के दो पुरुष रिश्तेदार उससे मिलने घर आए, तभी आरोपियों ने धावा बोल दिया। उन्होंने रिश्तेदारों को एक कमरे में बंधक बना दिया और महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पाप छिपाने के लिए दरिंदों ने महिला और उसके रिश्तेदारों को घर से बाहर घसीटकर पेड़ से बांध दिया और उन पर अश्लील गतिविधियों का झूठा आरोप लगाकर ग्रामीणों के सामने उन्हें अपमानित किया। 10 साल के मासूम बेटे की मां इस सदमे और चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती थी, जिसके चलते प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई।

बांग्लादेश में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पिछले 18 दिनों के भीतर ही 4 हिंदुओं की निर्मम हत्या की जा चुकी है। ताजा मामला जेसोर जिले के मोनिरामपुर का है, जहाँ सोमवार शाम को हिंदू कारोबारी राणा प्रताप बैरागी की सरेआम सिर में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने राणा को बातचीत के बहाने बाहर बुलाया और फिर उन पर ताबड़तोड़ सात राउंड फायरिंग कर दी। इससे पहले 18, 24 और 29 दिसंबर को भी हिंदू युवकों को मॉब लिंचिंग और टारगेट किलिंग का शिकार बनाया गया था। लगातार हो रही इन वारदातों से बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में भारी दहशत का माहौल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों के हनन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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