अदालत ने कहा- यह सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन नहीं बल्कि पैसों की हेराफेरी, उदयपुर पुलिस की जांच रहेगी जारी, बॉम्बे हाईकोर्ट से भी पहले लग चुका है झटका

जोधपुर। बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने भट्ट और उनके सहयोगियों के खिलाफ उदयपुर में दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की और माना कि यह मामला केवल दो पक्षों के बीच एग्रीमेंट टूटने का नहीं है, बल्कि इसमें प्रथमदृष्टया जनता के पैसे की हेराफेरी और गबन के गंभीर संकेत मिलते हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उदयपुर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपनी जांच को और तेज कर सकेगी।
पूरा विवाद उदयपुर के भूपालपुरा निवासी डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और अन्य सहयोगियों ने फिल्म प्रोजेक्ट्स में निवेश के नाम पर करीब 47 करोड़ रुपये का फंड लिया, लेकिन उस राशि का इस्तेमाल फिल्म बनाने के बजाय निजी लाभ और अन्य खातों में डायवर्ट करने के लिए किया गया। हालांकि, विक्रम भट्ट के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह मामला शुद्ध रूप से ‘सिविल’ प्रकृति का है और यह केवल एक अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) का विवाद है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एग्रीमेंट के हिसाब से कानूनी क्षेत्राधिकार मुंबई होना चाहिए था, न कि उदयपुर।
अदालत ने इन तमाम दलीलों को खारिज करते हुए सरकारी वकील और जांच रिपोर्ट के तथ्यों पर भरोसा जताया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट उल्लेख किया कि रिकॉर्ड के अनुसार, निवेश की गई 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त ही अन्य खातों में डायवर्ट कर दी गई थी। कोर्ट ने माना कि प्रारंभिक जांच में फर्जी इनवॉयस और बेईमानी के स्पष्ट सबूत मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि फंड का जानबूझकर गबन किया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फिल्म निर्माण के लिए दिया गया पैसा ऐसे वेंडर्स को भेजा गया, जिनका फिल्म उद्योग से कोई सरोकार ही नहीं था।
गौरतलब है कि इस मामले में विक्रम भट्ट और अन्य आरोपियों को बॉम्बे हाईकोर्ट से भी पहले तगड़ा झटका लग चुका है, जहाँ उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बात को भी संज्ञान में लिया कि याचिकाकर्ताओं ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने की कोशिश की है। अब जबकि हाईकोर्ट ने जांच में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है, विक्रम भट्ट पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि फिल्मी ग्लैमर की आड़ में किए गए वित्तीय अपराधों को कोर्ट महज एक ‘सिविल एग्रीमेंट’ मानकर राहत देने के मूड में नहीं है।
