पटवारी ने कहा, महापौर हो तो भी कागज तो लाने पड़ेंगे
पल पल राजस्थान/ महावीर व्यास

भीलवाड़ा। । भीलवाड़ा के महापौर (मेयर) राकेश पाठक और पटवारी के बिच शहरी सेवा शिविर में धक्का -मुक्की हो गई। इससे पहले महापौर ने झटके से धक्का देकर पास में पड़ी कुर्सी को भी गिरा दी थी। फाइल से संबंधित दस्तावेजों को लेकर पटवारी से खूब बहस हुई। पटवारी ने दो टूक कहा- आप चाहे महापौर हों, कागज तो लाने पड़ेंगे। यह पूरी घटना शहरी सेवा शिविर की है। मामला नगर निगम परिसर में संचालित हो रहे शहरी सेवा शिविर से जुड़ा है। मेयर राकेश पाठक और नगर विकास न्यास (यूआईटी) के पटवारी मानवेंद्र सिंह के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
शिविर में पटवारी मानवेंद्र सिंह काम कर रहे थे। इसी दौरान वार्ड 47 के रहने वाले मुकेश गांछा अपने काम के लिए पटवारी के पास आए। पटवारी ने ऑनलाइन पट्टा में खाते की नकल मांगी। पटवारी ने कहा कि तहसील से ये रिकॉर्ड लेकर आइए। मुकेश गांछा ने मेयर से इसकी शिकायत की। उन्होंने कहा- तिलकनगर गैर योजना क्षेत्र में स्थित भूखंड का पट्टा बनाने के लिए पटवारी 20-25 दिन से फाइल में खाते की नकल के लिए चक्कर कटवा रहे हैं। इसी प्रकार शिविर में आए एक और फरियादी राजू कसारा ने बताया कि यूआईटी से दुकान का प्लॉट खरीदा था। उसका नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। महापौर राकेश पाठक तुरंत यूआईटी के बाबू नरेश खोईवाल के पास पहुंचे और मामले की जानकारी ली। खोईवाल ने बताया कि फाइल पटवारी के पास है। इसके बाद महापौर पटवारी के पास गए। दोनों के बीच कहासुनी होने लगी।
यूआईटी ओएसडी और तहसीलदार ने किया बीच-बचाव

महापौर ने पटवारी से कहा कि फाइल यूआईटी के नाम है। यूआईटी में तो उसका रिकॉर्ड है तो वो आप उपलब्ध करवाओ, लेकिन पटवारी नहीं माना।
पटवारी ने कहा कि आप चाहे महापौर हों तो भी रिकॉर्ड आपको ही लाना पड़ेगा। यह सुनकर पाठक भड़क गए। दोनों के बीच तेज आवाज में कहासुनी होने लगी।
इसी दौरान पाठक ने पटवारी को हाथ से धक्का दे दिया। बाद में यूआईटी ओएसडी चिमन लाल और तहसीलदार नीरज रावत को बीच-बचाव करना पड़ा। इसको लेकर पटवारी मानवेन्द्र ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। महापौर पाठक ने फोन रिसीव नहीं किया।
महापौर पहले भी रहे हैं चर्चा में
इससे पहले भी महापौर पाठक अपने तेवरों को लेकर चर्चा में रहे हैं। नगर निगम की परमिशन के बिना सड़क खोदे जाने से नाराज होकर उन्होंने जलदाय विभाग के जेईएन श्रीराम मीणा के सामने हाथ-पैर जोड़े थे। 14 जुलाई की शाम को यह घटनाक्रम हुआ था। इस दौरान मेयर पाठक ने जेईएन मीणा से कहा था- जनता हमारी ऐसी-तैसी कर देती है। सड़कें खोदकर मत छोड़िए। आप लोग सड़क खोदते हो और लोग हमारी ऐसी-तैसी करते हैं। बारिश के मौसम में सड़कें खोदने से लोगों को परेशानी होती है।
निगम की बिना परमिशन जलदाय विभाग ने खोदी थी सड़क
शहर के पंचमुखी धाम से पंचमुखी हनुमान मंदिर तक जलदाय विभाग ने नगर निगम की परमिशन के बिना सड़क खोद दी थी। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। जलदाय विभाग की ओर से इस एरिया में पाइपलाइन डाली जा रही थी। विभाग का ठेकेदार सड़क की खुदाई कर रहा था। इस दौरान पार्षद हेमंत शर्मा मौके पर पहुंचे थे और काम रुकवा दिया था।

मेयर और JEN के बीच हुई थी बहस
काम रोके जाने का पता लगने पर जलदाय विभाग के जेईएन श्रीराम मीणा मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने काम शुरू करने के लिए पार्षद पर दबाव बनाया। पार्षद ने फोन कर मेयर राकेश पाठक को बुला लिया था। इस दौरान मेयर और जेईएन के बीच बहस हो गई थी। मेयर ने हाथ जोड़कर शिकायत की थी। मेयर ने कहा था- आप नगर निगम से रोड की कटिंग की परमिशन लो, इसके बाद काम शुरू करो। हमने आपको पहले भी कहा था कि रास्ते से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होगी। आपने फिर भी रोड खोद डाली। आप सरकारी अधिकारी होकर भी इस तरह नियमों के खिलाफ जाकर काम कर रहे हो। जनता परेशान हो रही है।
