
उदयपुर नगर निगम में नया बोर्ड बने डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शहर के कई इलाकों में अब भी पुराने पार्षदों के नाम और मोबाइल नंबर ही जनता को दिखाई दे रहे हैं। परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या में 10 की बढ़ोतरी हुई, कई वार्डों की सीमाएं बदलीं और अनेक क्षेत्र नए वार्डों में शामिल हो गए। इसके बावजूद निगम की ओर से लगाए गए सूचना बोर्डों को अपडेट करने की सुध नहीं ली गई है। हैरानी की बात यह है कि जिन वार्डों का स्वरूप ही बदल चुका है, वहां लगे बोर्ड आज भी पुराने पार्षदों की पहचान बता रहे हैं। कहीं पुराने पार्षद का नाम दर्ज है तो कहीं उनका मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक रूप से अंकित है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनके वर्तमान वार्ड का पार्षद कौन है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए किस जनप्रतिनिधि से संपर्क किया जाए? परिसीमन के बाद कई इलाकों की वार्ड सीमाएं बदल गई हैं। कुछ क्षेत्र पुराने वार्डों से अलग होकर नए वार्डों में शामिल हो चुके हैं। इसके बावजूद पुराने पार्षदों के नाम वाले बोर्ड जस के तस लगे रहना निगम की लापरवाही के साथ-साथ पुराने जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। नया बोर्ड बनने के बाद भी पुराने पार्षदों के नाम का प्रचार आखिर कब तक चलता रहेगा? आमजन का कहना है कि वार्डों की नई व्यवस्था लागू होने के बाद सूचना बोर्डों पर नए पार्षदों के नाम, मोबाइल नंबर और वार्ड की संशोधित सीमा की जानकारी अपडेट होनी चाहिए, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के लिए सही जनप्रतिनिधि तक पहुंचने में परेशानी नहीं हो। अब सवाल यह है कि पुराने पार्षदों के नाम वाले बोर्ड हटाने या अपडेट करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? निगम प्रशासन कब जागेगा और शहर की जनता को अपने नए पार्षद की सही पहचान कब मिलेगी?
