रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम, 3.25 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित डील पर वित्त वर्ष के अंत तक हो सकता है फैसला ,
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इस प्रस्ताव पर चालू वित्त वर्ष के अंत तक फैसला होने की संभावना है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि कंपनियों से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। भारत इस खरीद में ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल करना चाहता है।
प्रस्तावित योजना के तहत ज्यादातर राफेल विमानों की असेंबली भारत में की जाएगी। इनमें भारतीय हथियार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य स्वदेशी उपकरण लगाए जाएंगे। इससे देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ विदेशी निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

भारत के पास अभी 36 राफेल लड़ाकू विमान
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल लड़ाकू विमान ऑपरेशनल हैं। इसके अलावा अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-M विमानों की खरीद का समझौता किया गया था। इन विमानों की डिलीवरी 2030 तक पूरी होने की उम्मीद है।
26 नौसैनिक राफेल विमानों की आपूर्ति पूरी होने के बाद भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पास कुल 62 राफेल विमान हो जाएंगे। अब प्रस्तावित 114 नए राफेल विमानों की खरीद से देश की हवाई युद्ध क्षमता को और मजबूती मिल सकती है।
भारत में बनेंगे ज्यादातर राफेल विमान
114 राफेल विमानों की खरीद ‘बाय एंड मेक’ मॉडल के तहत प्रस्तावित है। इसके तहत फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी के सहयोग से भारत में विमानों की असेंबली और उत्पादन से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय को प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस परियोजना में भारतीय कंपनियों को भी अधिक से अधिक अवसर मिलें और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिले।
राफेल-M में भी लगेंगे स्वदेशी हथियार
भारत पहले ही नौसेना के लिए 26 राफेल-M विमानों की खरीद कर चुका है। अब फ्रांस की कंपनी इन विमानों में भारतीय हथियारों और सिस्टम को शामिल करने पर सहमत हुई है।
इससे भारत में विकसित मिसाइलों और अन्य रक्षा प्रणालियों को विदेशी लड़ाकू विमानों के साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी। नई प्रस्तावित डील में भी स्वदेशी हथियारों और तकनीक को प्राथमिकता देने की योजना है।
2027 में तेजस Mk2 की पहली उड़ान की तैयारी
रक्षा सचिव के अनुसार, भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk2 की पहली उड़ान 2027 के मध्य में प्रस्तावित है। शुरुआत में इसके प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। इसके बाद भारतीय वायुसेना विमानों का परीक्षण करेगी।
वायुसेना ने शुरुआती तौर पर करीब 120 तेजस Mk2 विमानों की आवश्यकता बताई थी। हालांकि, इनकी अंतिम संख्या प्रोटोटाइप के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद तय की जाएगी।
इस परियोजना की मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास होगी। इसके निर्माण में निजी कंपनियों और MSME सेक्टर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। निजी कंपनियां विमान के फ्यूजलेज और अन्य बड़े हिस्सों के निर्माण में सहयोग कर रही हैं।
AMCA प्रोजेक्ट पर भी भारत का फोकस
भारत पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) परियोजना को भी आगे बढ़ा रहा है। फिलहाल भारत ने किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में शामिल होने के बजाय अपने स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया है।
इस परियोजना के लिए शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियों ने परियोजना की तकनीकी जटिलता और पहली बार इस तरह का विमान विकसित करने की चुनौतियों को देखते हुए अतिरिक्त समय मांगा है।
सरकार इस दिशा में आगे की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी कर रही है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती
114 नए राफेल विमानों की प्रस्तावित खरीद, तेजस Mk2 का विकास और AMCA परियोजना भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
यदि 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी मिलती है, तो भारत की वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। साथ ही भारत में उत्पादन, स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल और निजी कंपनियों की भागीदारी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
