₹6.80 करोड़ के साइबर स्कैम में नया खुलासा, कमीशन के लिए बैंक अकाउंट देने वाला तगाराम गिरफ्तार

जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित ₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। बाड़मेर निवासी तगाराम पर साइबर ठगी की रकम को अपने बैंक खाते के जरिए इधर-उधर करवाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, तगाराम ने कमीशन के लालच में अपना बैंक अकाउंट दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराया था।

इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या 8 हो गई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।

बैंक अकाउंट बना ठगी की रकम का रास्ता

जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए बैंक खाते बेहद अहम कड़ी थे। ठगी से मिलने वाली रकम सीधे आरोपियों के खातों में रखने के बजाय अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में भेजी जाती थी। ऐसे खातों को पुलिस की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

आरोप है कि तगाराम ने भी इसी तरह अपना बैंक अकाउंट उपलब्ध कराया। बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के दौरान उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे बाड़मेर से गिरफ्तार किया और जयपुर लेकर आई।

24 अगस्त को खाते में आए थे ढाई लाख

पुलिस के अनुसार, तगाराम के खाते में 24 अगस्त 2026 को 2.50 लाख रुपये आए थे। इसके बाद वह हरेन्द्र उर्फ हनी के साथ बैंक पहुंचा और खाते से रकम निकालने का प्रयास किया।

जांच में बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को अहम माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खाते में आई रकम कहां से आई और इसके बाद वह किस-किस खाते तक पहुंची।

Telegram पर चलता था खातों का नेटवर्क

जांच में साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए एक संगठित नेटवर्क के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। गिरोह कथित तौर पर Telegram ग्रुप के जरिए म्यूल बैंक अकाउंट, ATM, सिम कार्ड और पासबुक जैसी किट उपलब्ध करवाता था।

ठगी की रकम खाते में आने के बाद उसे ATM, चेक, UPI, QR कोड और CDM के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य रकम के असली स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल बनाना था।

करोड़ों की रकम क्रिप्टो में बदलने का भी आरोप

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि कई बैंक खातों के जरिए रकम को बार-बार ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर रकम को USDT और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजा जाता था।

जांच एजेंसी क्रिप्टो लेन-देन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि साइबर ठगी की रकम आखिरकार किस नेटवर्क तक पहुंची।

अब पूरी मनी ट्रेल पर पुलिस की नजर

साइबर क्राइम पुलिस अब आरोपियों के WhatsApp रिकॉर्ड, CDR, IPDR, CAF और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है।

पुलिस का फोकस इस बात पर है कि ₹6.80 करोड़ की कथित ठगी में कौन-कौन लोग शामिल थे, किसने बैंक खाते उपलब्ध कराए, रकम किन खातों से होकर गुजरी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसा कहां भेजा गया।

DIG साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन और DSP गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए तगाराम को गिरफ्तार किया है। मामले में जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी भी सामने आ सकती है।

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