मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक हत्या के मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में न्यायपालिका पर दबाव और अपने सिद्धांतों को लेकर कई बड़ी टिप्पणियां की हैं। शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को मृत्युदंड सुनाते हुए जज ने कहा कि वे डरकर न्याय करने के बजाय अपने सिद्धांतों पर चलना पसंद करेंगे।
जज ने फैसले में लिखा कि “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं।” उन्होंने कहा कि जब तक वे अपने सिद्धांतों के अनुसार काम कर सकते हैं, तब तक सेवा करेंगे, अन्यथा इस्तीफा देना बेहतर समझेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वे जज की कुर्सी पर हैं, फैसला लेने का अधिकार उनका ही होगा।
5 महीने में 23 दोषियों को मृत्युदंड
फैसले में दी गई जानकारी के मुताबिक, रवि कुमार दिवाकर ने अपनी करीब 17 साल की न्यायिक सेवा में 36 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर में 5 महीने के कार्यकाल के दौरान उन्होंने 23 दोषियों को मृत्युदंड दिया है।
जज ने मुजफ्फरनगर में अपराध और गैंगस्टर के प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने अदालत परिसर में विक्की त्यागी की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराधियों में कानून का डर किस स्तर तक था।
ज्ञानवापी मामले के बाद धमकियों का भी जिक्र
रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में दावा किया कि वाराणसी के ज्ञानवापी मामले के बाद उन्हें और उनके परिवार को कई बार जान से मारने की धमकियां मिलीं। उन्होंने एक सोशल मीडिया अकाउंट से मिली धमकी का भी उल्लेख किया और कहा कि न्यायिक कार्यों के कारण उन्हें दबाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गैंगस्टर की ओर से संदेश मिला था, जिसमें मुकदमों को हटवाने और जरूरत पड़ने पर उनका तबादला करवाने की धमकी दी गई थी। जज ने कहा कि यदि किसी लोकतांत्रिक देश में न्यायाधीश दबाव या प्रभाव में आकर न्याय करने में असमर्थ हो जाएं तो यह गंभीर संकट की स्थिति है।
शहजादी हत्याकांड में पति को फांसी
यह टिप्पणी शहजादी हत्याकांड के फैसले के दौरान सामने आई। मामले के अनुसार, 23 जुलाई 2018 की रात नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट और गाली-गलौज करने के बाद उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शहजादी की मौत हो गई।
मामले में शहजादी के माता-पिता और भाई अपने बयानों से मुकर गए थे, लेकिन अस्पताल में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने शहजादी द्वारा दिया गया अंतिम बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। इसमें शहजादी ने अपने पति नदीम पर आग लगाने का आरोप लगाया था।
अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 7 सितंबर को नदीम को फांसी की सजा सुनाने के साथ उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, शहजादी के बयान में दहेज की मांग या प्रताड़ना का उल्लेख नहीं होने के कारण नदीम को दहेज हत्या के आरोप से बरी किया गया। आरोपी ननद सोनी को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि सास शमशीदा की पहले ही मौत हो चुकी है।
नवंबर 2025 में संभाला था कार्यभार
रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी और मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली में भी न्यायिक जिम्मेदारियां संभाली थीं।
फैसले में जज ने न्यायिक पद की मर्यादा का भी उल्लेख किया और कहा कि कुछ बातों को जानने के बावजूद इस समय उनके बारे में बोलना उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए न्यायाधीश का निर्भीक होकर निर्णय लेना जरूरी है।
