पूरी उम्र की कमाई ले गए चोर, इंसाफ मांगते-मांगते दम तोड़ द‍िया किसान; पुलिस बोली- जिम्मेदार तो भगवान है

सांचौर। जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र के चितलवाना ब्लॉक के चारणीम गांव में चोरी की घटना से आहत एक किसान की मौत हो गई। 60 वर्षीय किसान Raichand Ravna Rajput करीब एक महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते रहे और 4 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके घर से करीब 3 किलो चांदी के गहने और नकदी चोरी हो गई थी, जिसके बाद से वे गहरे तनाव में थे।

इंसाफ के लिए बैठे थे भूख हड़ताल पर

चोरी की घटना का खुलासा नहीं होने से नाराज रायचंद्र ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। पुलिस अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर भूख हड़ताल खत्म करवाई, लेकिन इसके अगले ही दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि चोरी का सदमा और भूख हड़ताल के दौरान हुई कमजोरी उनकी मौत की वजह बनी।

एक ही रात में 2 मंदिर और 5 घरों में चोरी

घटना 6 जनवरी की रात की है, जब चारणीम गांव में चोरों ने एक ही रात में दो मंदिरों और पांच घरों के ताले तोड़ दिए। रायचंद्र के घर से चोर चांदी के कंदोरे, कातरियां, काकणियां, तोड़े, पायजेब सहित करीब 3 किलो चांदी के आभूषण और नकदी लेकर फरार हो गए। उस समय इन गहनों की बाजार कीमत करीब 8 लाख रुपए बताई गई थी।

22 दिन तक नहीं मिला कोई सुराग

घटना के बाद ग्रामीणों ने कई बार पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन 22 दिन तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इससे नाराज होकर 29 जनवरी को तीन गांवों के पांच ग्रामीण चितलवाना में भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिनमें रायचंद्र भी शामिल थे। तीन दिन बाद अधिकारियों के आश्वासन पर 31 जनवरी को भूख हड़ताल खत्म करवाई गई।

भूख हड़ताल के बाद बिगड़ी तबीयत

परिजनों के अनुसार, भूख हड़ताल खत्म होने के एक दिन बाद ही रायचंद्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें पहले सांचौर, फिर डीसा और बाद में अहमदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में उनके दिमाग की मुख्य नस में खून का थक्का जमने की पुष्टि हुई, जिससे शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा हो गया। बाद में जोधपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान 4 मार्च को उनकी मौत हो गई।

पुलिस के जवाब पर उठे सवाल

मृतक के भतीजे राजू सिंह का कहना है कि अधिकारियों ने जल्द चोरी का खुलासा करने का भरोसा दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मौत के बाद जब जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया गया तो पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

चितलवाना थाने के एसएचओ से जब पूछा गया कि किसान की मौत का जिम्मेदार कौन है, तो उनका जवाब था—“भगवान।” इस बयान के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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