
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने कुख्यात तस्कर कंवरलाल को ऑपरेशन मदरक्तिम के तहत उदयपुर के एक निजी हॉस्पिटल से गिरफ्तार किया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक डील के लिए जाते वक्त एक्सीडेंट होने के कारण आरोपी कंवरलाल के पैरों में चोट लगी थी। वह इलाज के लिए उदयपुर आने वाला था। तभी पुलिस ने सभी हॉस्पिटल्स की निगरानी शुरू की। वह जेपी हॉस्पिटल में इलाज कराने पहुंचा, तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया।
4 साल से फरार 25 हजार का इनामी आरोपी
पुलिस के अनुसार, चार साल से फरार राजस्थान के टॉप-10 आरोपियों में शुमार 25 हजार रुपए इनामी बदमाश कंवरलाल (45) पुत्र ओंकारलाल निवासी निकुम्भ, चित्तौड़गढ़ को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि आरोपी कंवरलाल पूरे मारवाड़ और मेवाड़ में अफीम और डोडा चूरा की तस्करी का एक मुख्य सूत्रधार था। मध्यप्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से अपने गारंटी पर मादक पदार्थ लाकर निकुम्भ इलाके में अपने ठिकाने पर जमा करके रखता था। इसने 8वीं में फेल होकर पढ़ाई छोड़ दी और आवारागर्दी शुरू कर दी थी।
नशा व्यापारियों के ठाठ देखकर मन फिसला और नशे की दुनिया में कदम रखा
आरोपी कंवरलाल को पिता ने खेती-बाड़ी में लगाया तो उसका मन नहीं लगा। फिर एसटीडी बूथ खोलकर अपना धंधा शुरू किया। कम पैसे आते देख वह महाराष्ट्र चला गया और होटलों में वेटर का काम करने लगा। होटल में नशा व्यापारियों की ठाठ और समृद्धि देखकर मन फिसला। फिर अपने गांव आकर नशे की दुनिया में कदम रखा। नशे से पैसा आने लगा तो परिवार का प्यार भी मिलने लगा।
भाई-भतीजों को धंधे में शामिल किया
आरोपी कंवरलाल ने अपने कई भाई-भतीजों को इस धंधे में शामिल कर लिया था। उन्हें वह कमीशन देता था। पिछले चार साल में उसकी फरारी के दौरान उसके भाई-भतीजे ही ग्राहकों से सौदा करते रहे। आरोपी ने अपने ठिकाने गुप्त बनाए रखे। ग्राहकों को अपना नाम भी बदलकर कभी दिनेश तो कभी रमेश बताता था। पकड़े जाने के डर से वह मोबाइल नहीं रखता।
