जयपुर में यूजीसी प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज व महिलाओं पर वाटर कैनन का उपयोग उचित नहीं: बिछावेडा

उदयपुर। क्षत्रिय करणी सेना के उदयपुर देहात जिला अध्यक्ष कुंवर ओनार सिंह बिछावेड़ा ने जयपुर में यूजीसी विरोध प्रदर्शन के दौरान देवराज सिंह की मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन में लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल उचित नहीं है। श्री बिछावेडा ने कहा कि महिलाओं पर वाटर कैनन का इस्तेमाल को गंभीर विषय है।
बिछावेड़ा ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ति को हमारी कमजोरी नहीं समझा जाए। सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुनने और लोकतांत्रिक तरीके से संवाद स्थापित करना चाहिए। बिछावेड़ा ने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन का मंजर भी देश ने देखा है। वहां कथित तौर पर राष्ट्र के विरुद्ध अभद्र भाषा के प्रयोग, सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई जैसी घटनाओं के आरोप सामने आए थे। ऐसे में सवाल है कि क्या जयपुर में भी वैसा ही कोई मंजर था? यदि नहीं, तो फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
बिछावेड़ा ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने जयपुर में यूजीसी विवाद को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होेंने उनके रुख को समाज के मुद्दे पर मुखर और दबंग तरीके से आवाज उठाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी, कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह और धर्मेंद्र सिंह राठौड़ द्वारा जयपुर में करणी सेना के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज एवं वाटर कैनन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र भी यूजीसी की नई गाइडलाइंस पर आपत्ति जताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग कर चुके हैं। इस प्रकार यूजीसी रोलबेक-2026 का मुद्दा अब सामाजिक आंदोलन के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बनता जा रहा है।

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