दूसरों को सुख देंगे तो जीवन में लौटकर आएगा सुख, कुदरत के यहां देर हो सकती है, अंधेर नहीं : आचार्य प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर

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उदयपुर, 26 अगस्त। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज, मुनिराज नीतिप्रभ विजयजी महाराज एवं साध्वी श्रुतवर्धना श्रीजी महाराज आदि ठाणा की पावन निश्रा में 45 दिवसीय सिद्धि तप आराधना श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जारी है। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रवचन हो रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बन रहे हैं।
श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज ने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव सुख चाहता है और दुख से दूर रहना चाहता है। जीवन में मिलने वाले सुख-दुख के पीछे प्रकृति का अटल नियम है कि हम दूसरों को जो देते हैं, वही लौटकर हमें प्राप्त होता है। किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे वैसी ही फसल प्राप्त होती है। आम बोने पर आम और बबूल बोने पर कांटे ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार यदि हम अन्य जीवों को सुख, शांति और प्रसन्नता देते हैं तो हमारे जीवन में भी खुशहाली आती है। वहीं दूसरों को दुख, तकलीफ और अशांति देने पर जीवन में दुखों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में किसी के जीवन में सुख या दुख दिखाई दे सकता है, लेकिन यह पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम भी हो सकता है। कर्मों का फल समय के साथ बदलता है। कुदरत के आगे किसी का नहीं चलता, कुदरत के यहां देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होती। आचार्यश्री ने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन एक सिद्धांत सभी में समान है कि व्यक्ति ने दूसरों के साथ जैसा व्यवहार किया है, उसे कालांतर में वैसा ही फल प्राप्त होता है। यदि किसी के दुख और पीड़ा को देखकर उसे दूर करने की इच्छा, हमदर्दी और करुणा का भाव पैदा होता है तो सुख पाने से कोई नहीं रोक सकता। इसके विपरीत दूसरों के दुख को देखकर आनंद की अनुभूति होती है तो उस दुख से कोई बचा नहीं सकता।
धर्मसभा में डॉ. शैलेन्द्र हिरण, राजकुमार बापना, नरेंद्र सिंघवी, भोपाल सिंह सिंघवी, मनीष दोशी, अभिषेक हुमड़, अशोक सेठ, प्रकाश गांधी, राकेश चेलावत, अशोक जैन, राजेंद्र कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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