जयपुर। राजस्थान कांग्रेस ने सोमवार, 28 सितंबर को चुनाव प्रक्रिया और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर जयपुर में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक पर सभा के बाद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस के अन्य नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर विद्याधर नगर थाने ले जाया गया।
कांग्रेस ने प्रदर्शन के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठाईं। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते हुए अपनी मांगें रखीं। कांग्रेस ने इससे पहले 28 सितंबर को जयपुर में प्रदर्शन की घोषणा की थी।




गहलोत ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव प्रक्रिया और परिसीमन को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए। उनके ये बयान कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं।
डोटासरा ने SIR पर उठाए सवाल
गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस पहले भी SIR तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक कर चुकी है।
वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के SIR संबंधी आरोपों पर उनसे प्रमाण और दस्तावेज सार्वजनिक करने को कहा है। यह आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक दलों के बीच जारी विवाद का हिस्सा हैं।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था
प्रदर्शन को देखते हुए शहीद स्मारक और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया था। बैरिकेडिंग के साथ वाटर कैनन भी लगाए गए थे। प्रदर्शन के कारण जयपुर के कुछ मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
फिलहाल प्रदर्शन, हिरासत और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस के आरोपों और उनके जवाब में सामने आए दावों को अलग-अलग स्रोतों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर देखा जाना जरूरी है।
