
चित्तौड़गढ़। राजस्थान की चित्तौड़गढ़ जिला जेल से भ्रष्टाचार और सुरक्षा में भारी चूक का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लंबे समय से जेल में बंदियों को अवैध और प्रतिबंधित सामग्री उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों की पुष्टि अब विभागीय जांच में हो गई है। जांच में इस बात का पर्दाफाश हुआ है कि जेल प्रशासन की नाक के नीचे न केवल निषिद्ध सामान की तस्करी हो रही थी, बल्कि इसके बदले पैसों का लेन-देन भी हाईटेक तरीके से किया गया। महानिदेशालय कारागार जयपुर के आदेश पर अब चित्तौड़गढ़ कोतवाली थाने में तीन बंदियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है।
इस पूरे प्रकरण की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जेल की चारदीवारी के भीतर चल रहे इस अवैध खेल के लिए पैसों का लेन-देन सीधे हाथ में न होकर बैंक खातों और यूपीआई के जरिए किया जा रहा था। जनवरी 2022 से जनवरी 2023 के बीच चले इस खेल में बंदियों के परिजनों ने विभिन्न मोबाइल नंबरों और बैंक अकाउंट्स में मोटी रकम ट्रांसफर की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, जेल के बाहर से सामान को दीवार के ऊपर से फेंका जाता था और फिर उसे अंदर मौजूद बंदियों तक पहुंचाया जाता था। इस काम में तत्कालीन डिप्टी जेलर अशोक पारीक सहित कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है, जिनकी जांच अब पुलिस के रडार पर है।
जांच के दौरान जब बंदियों के परिजनों के बैंक स्टेटमेंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन खंगाले गए, तो भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हाथ लगे। बंदी मोहनलाल मीणा की पत्नी, मोहन जाट के रिश्तेदार रामचंद्र जाट और खुला बंदी शिविर के लालूराम मीणा के खातों में संदिग्ध लेन-देन पाया गया। रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि इन खातों में आई रकम का एक बड़ा हिस्सा भीलवाड़ा रोड स्थित एटीएम से निकाला गया और कई बार इसे अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर किया गया। यह पूरी प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित थी कि जेल के भीतर और बाहर का नेटवर्क पूरी तरह से सक्रिय नजर आता है।
फिलहाल, जेल प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने बंदी मोहनलाल मीणा, मोहन जाट और लालूराम मीणा को नामजद करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। कोतवाली थाने के अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन जेल अधीक्षक योगेश तेजी और अन्य स्टाफ के बयानों के आधार पर फाइल तैयार की गई है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस पूरे घोटाले में कुल कितनी राशि का गबन हुआ और जेल प्रशासन के कौन-कौन से चेहरे इस काली कमाई में हिस्सेदार थे। आने वाले दिनों में कुछ विभागीय अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
