उदयपुर जिले के एक ग्रामीण थाना क्षेत्र से मानव तस्करी से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक शादीशुदा युवती को उसके ही चचेरे भाई ने बहला-फुसलाकर Ahmedabad ले जाकर वहां ₹1.50 लाख में बेच दिया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने परिवार के साथ रहती थी। इसी दौरान उसके काका का लड़का यानी चचेरा भाई उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ Ahmedabad ले गया। बताया जा रहा है कि युवती को यह भरोसा दिलाया गया था कि उसे वहां काम दिलाया जाएगा और उसके लिए बेहतर रोजगार का इंतजाम किया जाएगा। इसी भरोसे में युवती उसके साथ Ahmedabad चली गई।
आरोप है कि Ahmedabad पहुंचने के बाद चचेरे भाई ने युवती को एक फैक्ट्री में काम करने वाले युवक के हाथों ₹1.50 लाख में बेच दिया। इसके बाद युवती को अपने साथ रखने वाले युवक ने उसे अपने कब्जे में रखा। मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि युवती को Ahmedabad ले जाने वाला व्यक्ति कोई बाहरी या अनजान शख्स नहीं, बल्कि उसका अपना चचेरा भाई बताया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी हड़कंप मच गया। परिजनों ने युवती से संपर्क करने और उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवती को किस परिस्थिति में Ahmedabad ले जाया गया, उसे किस व्यक्ति के पास रखा गया और कथित तौर पर हुए पैसों के लेन-देन में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि युवती को Ahmedabad ले जाने से पहले उससे क्या कहा गया था और क्या उसे पहले से इस बात की जानकारी थी कि उसे किसी व्यक्ति के हाथों बेचने की योजना बनाई गई है। पुलिस कथित खरीदार और युवती को Ahmedabad ले जाने वाले चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच कर सकती है।
मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि रोजगार दिलाने के नाम पर युवती को दूसरे राज्य में ले जाकर उसके साथ धोखा किया गया या इसके पीछे पहले से कोई सुनियोजित योजना थी। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोपों की जांच जारी है। युवती के बयान और पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में पुलिस द्वारा आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका सामने आने के बाद ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
