
जयपुर। राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष जांच टीम (SIT) ने आज अलसुबह एक बेहद बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पूर्व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 900 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है।
सुबह 5 बजे एसीबी की टीम ने घर पर दी दबिश
एसीबी के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि एसीबी की एसआईटी (SIT) सुबह करीब 5 बजे जयपुर रेलवे स्टेशन के पास, पावर हाउस रोड स्थित सैन कॉलोनी में पूर्व मंत्री महेश जोशी के आवास पर पहुंची। पूरी तैयारी के साथ गई टीम ने तड़के ही महेश जोशी को उनके घर से हिरासत में ले लिया और बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे राजनीतिक हलके में हड़कंप मच गया है।
पूर्व मंत्री सहित 22 अधिकारियों पर दर्ज है FIR
जल जीवन मिशन में हुए इस बड़े घोटाले को लेकर एसीबी की ओर से पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन चीफ इंजीनियर राम करण मीणा, दिनेश गोयल, एडिशनल चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विशाल सक्सेना जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
इस पूरे मामले में एसीबी को एक ईमेल आईडी से बहुत बड़ी लीड मिली थी। एक-एक आईडी की गहनता से जांच करने के बाद इस भ्रष्टाचार में लिप्त सभी अधिकारियों के नामों का खुलासा हुआ। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग मिलीभगत कर फेक सर्टिफिकेट (फर्जी दस्तावेजों) के आधार पर टेंडर पास कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार कर रहे थे।
पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद मंत्री तक पहुंची आंच
इस घोटाले की कड़ियां लगातार जुड़ती जा रही हैं। इसी कड़ी में बीते 9 अप्रैल को एसीबी ने जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस (ACS) सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच सीधे पूर्व मंत्री महेश जोशी तक जा पहुंची है। एसीबी ने सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के दौरान जलदाय मंत्री रहते हुए महेश जोशी की इस पूरे घोटाले में भूमिका और लेन-देन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई है।
फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर हड़पे 900 करोड़ से अधिक के टेंडर
यह पूरा घोटाला केंद्र सरकार की हर घर नल पहुंचाने वाली ‘जल जीवन मिशन योजना’ से जुड़ा हुआ है। साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) दिखाकर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए थे।
श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी: इस कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाण पत्रों के सहारे पीएचईडी की 68 निविदाओं (निविदा प्रक्रिया) में भाग लिया और चालाकी से 31 टेंडरों में एल-1 (L-1) के रूप में 859.2 करोड़ रुपये के काम हासिल कर लिए।
श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी: इस कंपनी ने भी इसी तर्ज पर 169 निविदाओं में भाग लिया और 73 निविदाओं में एल-1 के रूप में बाजी मारकर 120.25 करोड़ रुपये के टेंडर अपने नाम किए।
ईडी और सीबीआई की एंट्री से कसा शिकंजा
घोटाले का खुलासा होने पर जब एसीबी ने अपनी जांच शुरू की, तो विभाग के कई भ्रष्ट अधिकारी इसकी जद में आ गए। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केस दर्ज किया और पूर्व मंत्री महेश जोशी तथा उनके करीबी सहयोगी संजय बड़ाया सहित कई आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी।
इस बीच, सीबीआई (CBI) ने भी 3 मई 2024 को इस मामले में नया केस दर्ज किया था। ईडी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 4 मई को सभी पुख्ता सबूत और दस्तावेज राज्य की एसीबी को सौंप दिए थे। इस महाघोटाले में पीयूष जैन, पदम चंद जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, जिसके बाद अब पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी ने प्रदेश की सियासत में नया भूचाल ला दिया है।
