
जोधपुर हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता श्वेतांबरी विक्रम भट्ट और विक्रम प्रवीण भट्ट के बैंक खातों को फ्रीज करने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसी के निर्देश पर पूरे बैंक खाते को ब्लॉक करना अनुचित है और यह कार्रवाई केवल विवादित राशि तक सीमित होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति फरजंद अली की अदालत में 19 मार्च को सुनवाई हुई थी, जिसका आदेश 28 मार्च को जारी किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बैंक खाते के डेबिट संचालन पर रोक केवल उसी राशि तक लगाई जा सकती है, जो जांच के दायरे में विवादित हो।
यह मामला उदयपुर निवासी डॉ. अजय मुरडिया द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें भट्ट दंपती पर करीब 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, फिल्मों के निर्माण के लिए हुए व्यावसायिक समझौते के तहत बड़ी राशि निवेश की गई, लेकिन तय प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए और फर्जी बिलों के जरिए रकम के गबन का आरोप लगाया गया।
मामले में उदयपुर पुलिस के निर्देश पर बैंकों ने भट्ट दंपती के सभी खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि इससे उनका पूरा आर्थिक जीवन ठप हो गया—वे दैनिक खर्च, कर्मचारियों का वेतन, कर्ज की किस्तें और अन्य जरूरी भुगतान तक नहीं कर पा रहे थे।
कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त आधार के पूरे खाते को फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। अदालत ने इसे “असाधारण उपाय” बताते हुए कहा कि इसका उपयोग बेहद सावधानी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने आदेश दिया कि लगभग 30 करोड़ रुपए की विवादित राशि तक ही डेबिट संचालन पर रोक रहे। इसके अलावा खातों को सभी वैध लेनदेन के लिए चालू रखा जाए। साथ ही संबंधित बैंकों—एचडीएफसी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक—को भट्ट दंपती के खातों को तुरंत डी-फ्रीज करने के निर्देश दिए गए।
