
बारां: राजस्थान के हाड़ौती अंचल में आधुनिक इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार आकार ले रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों की किस्मत बदल देगा। परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना के तहत बनाई जा रही देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब अपने अंतिम चरण में है। विशाल पहाड़ों को चीरकर बनाई गई यह टनल न केवल तकनीक का नमूना है, बल्कि बारां, कोटा और झालावाड़ के लाखों परिवारों के लिए ‘जीवनदायिनी’ साबित होने वाली है।
पहाड़ चीरकर बन रही वाटर टनल
अकावद बांध पर बन रही यह टनल इस पूरी परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्गम पहाड़ों के बीच से रास्ता बनाकर इस टनल का निर्माण किया गया है, जिससे पानी का प्रवाह निर्बाध रूप से हो सकेगा। इस टनल के जरिए बारां जिले के उन सूखे इलाकों तक पानी पहुंचेगा, जहां खेती केवल बारिश पर निर्भर थी। अब हजारों एकड़ भूमि इस टनल के पानी से लहलहाएगी।
7 मार्च को ‘नौनेरा’ और ‘परवन’ का महा-भूमि पूजन
आगामी 7 मार्च को कोटा एयरपोर्ट के पास एक भव्य समारोह में नौनेरा और परवन-अकावद दोनों परियोजनाओं का भूमि पूजन किया जाएगा। 1,661.14 करोड़ की लागत वाली इस योजना से कोटा और बूंदी के 749 गांवों को पेयजल मिलेगा। इसके चारों पैकेजों के कार्यादेश दिसंबर 2025 में ही जारी हो चुके हैं। इन दोनों महा-परियोजनाओं के पूरा होने पर हाड़ौती के लगभग 2.65 लाख परिवारों के घरों में नल से जल पहुंचेगा।
पानी का संकट होगा दूर
इस टनल और पेयजल नेटवर्क के तैयार होने से महिलाओं को पानी के लिए मीलों पैदल नहीं चलना होगा। साथ ही, परवन परियोजना से बारां के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा। यह परियोजना राजस्थान के बुनियादी ढांचे के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
