बेअसर रही वार्ता, बेनतीजा रही गुहार, अब चक्का जाम की दहलीज पर खड़ा राजस्थान

जयपुर। राजस्थान में निजी बस संचालकों और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है, जिसके चलते आगामी 24 जनवरी से प्रदेश भर में निजी बसों के पहिए थम सकते हैं। मंगलवार को जयपुर में बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच हुई अहम बैठक के बेनतीजा रहने के बाद बस संचालकों ने आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी कर ली है। हालांकि इस दौरान बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को साझा किया, लेकिन वहां भी वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। सरकार के कड़े रुख से नाराज प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने अब राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने का कड़ा फैसला लिया है।

बस संचालकों की इस नाराजगी की मुख्य वजह परिवहन विभाग द्वारा हाल ही में शुरू की गई सख्त कार्रवाई और भारी-भरकम चालान हैं। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में हुए दर्दनाक बस हादसों के बाद सरकार और परिवहन विभाग ने निजी बसों की जांच तेज कर दी है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर चालान काटे जा रहे हैं। बस ऑपरेटरों का तर्क है कि वे सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करने के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विभाग द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों के अनुसार हजारों बसों में रातों-रात तकनीकी बदलाव करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

ऑपरेटर्स का आरोप है कि मॉडिफिकेशन के नाम पर दो-दो लाख रुपये तक के भारी जुर्माने वसूले जा रहे हैं, जो बस मालिकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बना रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि आवश्यक सुधार और बदलाव के लिए परिवहन विभाग को कम से कम तीन महीने का समय देना चाहिए। बस एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश भर में सभी प्रकार की निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यदि यह हड़ताल प्रभावी होती है, तो 24 जनवरी को प्रदेश के लाखों यात्रियों को भारी असुविधा और परिवहन संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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