तिलक के पीछे छिपा था हत्यारा और माला फेरते हुए रची गई साजिश, मठ से निकला ‘मौत का सौदागर’, अब खाकी की गिरफ्त में

चित्तौड़गढ़। कहते हैं कि भगवा चोला वैराग्य और शांति का प्रतीक है, लेकिन चित्तौड़गढ़ में भाजपा नेता रमेश ईनाणी हत्याकांड ने इस विश्वास की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। जिस रामस्नेही संप्रदाय के संतों के आगे पूरा शहर श्रद्धा से सिर झुकाता था, उन्हीं के मठ की चहारदीवारी के भीतर ‘राम-राम’ की गूंज के बीच एक निर्दोष की मौत का ‘डेथ वारंट’ लिखा जा रहा था। आज जब पुलिस ने इस साजिश की कड़ियों को जोड़ा, तो आस्था और भरोसे का खून होता देख हर कोई सन्न है।

शूटर मनीष ने 2022 में ही की थी ‘रेकी’

एडिशनल एसपी सरिता सिंह ने बताया कि जेल से रिमांड पर लाए गए शूटर मनीष दुबे से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 11 नवंबर को हुई हत्या की साजिश साल 2022 में ही तैयार हो गई थी। मनीष दुबे 2022 में चित्तौड़गढ़ आया था और उसने जानबूझकर रमेश ईनाणी से झगड़ा किया था। इस विवाद का एकमात्र मकसद ईनाणी को करीब से पहचानना और उसके आने-जाने के रास्तों की रेकी करना था।

संत रमता राम की तलाश, संप्रदाय ने पल्ला झाड़ा

पुलिस जांच में रामस्नेही संप्रदाय चित्तौड़गढ़ से जुड़े संत रमता राम की मुख्य भूमिका उजागर हुई है। रमता राम अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है। घटना के बाद संप्रदाय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों संतों को निष्कासित कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक बेशकीमती जमीन के विवाद के चलते ईनाणी की हत्या का ‘डेथ वारंट’ जारी किया गया था।

बीमारियों से घिरा है ‘सुपारी किंग’

पुलिस ने जब भजनाराम को गिरफ्तार किया, तो उसकी मेडिकल स्थिति ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया। आरोपी भजनाराम कैंसर और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। उसकी दवाइयां चल रही हैं, जिसे देखते हुए पुलिस ने उसका मेडिकल फिटनेस टेस्ट करवाया है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम पिछले तीन दिनों से बाली में डेरा डाले हुए थी। अब पुलिस का पूरा ध्यान फरार आरोपी रमताराम को दबोचने पर है, जिसके पकड़े जाने के बाद इस हत्याकांड की कई और परतें खुल सकती हैं।

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