जेल से बाहर आने पर ढोल-नगाड़ों के साथ निकाला जुलूस, विधायक भी रहे मौजूद

उदयपुर। झीलों की नगरी में कानून और नैतिकता को ताक पर रखने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है। राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने और उसे पकाकर खाने के गंभीर मामले में जमानत पर छूटे कांग्रेस नेता रूपलाल मीणा का शनिवार को जेल के बाहर किसी ‘विजेता’ की तरह स्वागत किया गया। 10 दिन जेल की सलाखों के पीछे काटने के बाद बाहर निकले आरोपियों को समर्थकों ने न केवल मालाओं से लाद दिया, बल्कि ढोल-नगाड़ों के साथ कंधों पर बैठाकर पूरे शहर में जुलूस निकाला। इस विवादित स्वागत समारोह में क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री की मौजूदगी ने आग में घी डालने का काम किया है।
जेल के गेट से मंदिर तक ‘जश्न’ का माहौल शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही खेरवाड़ा एडीजे कोर्ट से जमानत मिलने के बाद ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रूपलाल मीणा, हिस्ट्रीशीटर अर्जुन मीणा और राकेश मीणा जेल के गेट से बाहर आए, वहां पहले से मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। हद तो तब हो गई जब आरोपियों को सीधे ऋषभदेव बस स्टैंड स्थित राम मंदिर ले जाया गया, जहां उन्होंने भगवान के दर्शन किए। शाम को ऋषभदेव शहर में ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें आरोपियों को कंधों पर उठाकर घुमाया गया। इस दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान खेरवाड़ा विधायक दयाराम परमार ने भी उनका स्वागत किया, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और आम जनता में भारी आक्रोश है।
खेत में चल रही थी मोर की ‘नॉनवेज पार्टी’ इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि बेहद घिनौनी है। 21 दिसंबर की शाम ऋषभदेव के बीलख गांव में आरोपी रूपलाल मीणा के खेत पर बने एक कमरे में ‘नॉनवेज पार्टी’ की तैयारी चल रही थी। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वहां राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार कर उसे पकाया जा रहा है। पुलिस ने जब छापेमारी की, तो मौके से रूपलाल के साथ कुख्यात हिस्ट्रीशीटर अर्जुन मीणा (जिस पर 50 से अधिक मामले दर्ज हैं) और राकेश मीणा को रंगे हाथों पकड़ा गया था। पुलिस ने मौके से मोर के अवशेष और मांस बरामद किया था, जिसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
जनता उठा रही सवाल: क्या यह अपराध का महिमामंडन नहीं? राष्ट्रीय पक्षी के शिकार जैसे संगीन जुर्म के आरोपियों का इस तरह सार्वजनिक स्वागत किए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग पूछ रहे हैं कि क्या राजनीतिक रसूख के आगे कानून और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कोई मायने नहीं रखता? एक तरफ जहां मोर के शिकार को लेकर कड़े कानून (Wild Life Protection Act) हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं द्वारा आरोपियों को कंधे पर बिठाना समाज में गलत संदेश दे रहा है। स्वागत कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस सदस्य जय प्रकाश वानावत और अन्य कई स्थानीय नेता भी शामिल थे, जो अब जनता के निशाने पर हैं।
