
राजसमंद। मेवाड़ के प्रसिद्ध और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र प्रभु श्री खजुरिया श्याम भैरुनाथ के दरबार में नववर्ष का स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं रहा। राजसमंद और भीलवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित इस दिव्य देवालय में नए साल के पहले दिन आस्था का ऐसा समंदर उमड़ा कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची। अलसुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर रात तक अनवरत जारी रहीं। इस खास मौके पर मंदिर मंडल की ओर से भगवान का अत्यंत मनमोहक और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे।
भक्ति और सुरों की जुगलबंदी: झूम उठे हजारों हाथ नववर्ष की पूर्व संध्या और प्रथम दिन की रात्रि को आयोजित विशाल भजन संध्या इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। इस कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मेवाड़ और आसपास के क्षेत्रों से आए 200 से अधिक लब्धप्रतिष्ठित भजन गायकों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। गणपति वंदना के साथ शुरू हुआ सुरों का यह सफर जैसे-जैसे आगे बढ़ा, पूरा परिसर भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। जब कलाकारों ने अपनी जादुई आवाज में ‘ओ कान्हा अब तो मुरली की’ और ‘हारे का सहारा है मेरा खजुरिया श्याम भैरुनाथ’ जैसे सुप्रसिद्ध भजन छेड़ें, तो वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचने लगे। ढोलक की थाप, मंजीरों की खनक और ‘जय श्री भैरुनाथ’ के गगनभेदी जयकारों ने माहौल को पूरी तरह दिव्य बना दिया।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, सेवा का दिखा अनूठा जज्बा बाबा के दर्शनों की अभिलाषा लेकर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि झोर, गोवलिया, देवली, लापस्या, खंडेल, कुंवारिया, नेगड़िया खेड़ा, छापरी, सालेरा और कांगणी जैसे दर्जनों गांवों से हजारों की तादाद में नर-नारी और बच्चे पहुंचे। भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह और अनुशासन देखने को मिला। मंदिर समिति और स्थानीय स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं को संभालने में दिन-रात एक कर दिया ताकि किसी भी दर्शनार्थी को असुविधा न हो। भजनों की मधुर धुनों के बीच युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई अपनी सुध-बुध खोकर बाबा की भक्ति में लीन नजर आया।
आस्था और विश्वास का प्रतीक बना दरबार खजुरिया श्याम भैरुनाथ का यह दरबार मेवाड़ अंचल में अपनी चमत्कारिक महिमा के लिए जाना जाता है। नए साल पर इतनी बड़ी संख्या में कलाकारों का जुटना और बिना रुके घंटों तक प्रभु की महिमा का गुणगान करना, इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि साल के पहले दिन बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने से पूरे वर्ष सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। कार्यक्रम के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों दीपकों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगा उठा, जो अपने आप में एक अविस्मरणीय नजारा था।
