मौत का साया! राजस्थान के 502 सरकारी स्कूलों की छतें जर्जर, 212 बिल्डिंग तो बैठने लायक भी नहीं

अब दूसरे स्कूलों में होगी पढ़ाई

बीकानेर/जयपुर: झालावाड़ के पिपलोदी में पांच महीने पहले हुए उस दर्दनाक हादसे को कोई नहीं भूला है, जिसमें स्कूल की छत गिरने से 7 मासूमों की जान चली गई थी। उस वक्त शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने खुद को जिम्मेदार बताते हुए व्यवस्था सुधारने का वादा किया था। अब उसी वादे के बाद हुए सर्वे में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। प्रदेश में 502 स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर पाई गई है, जिनमें से 212 भवन तो इतने खतरनाक हैं कि वहां बच्चों को बैठाना साक्षात मौत को दावत देने जैसा है। अब विभाग ने इन स्कूलों के बच्चों को आनन-फानन में पास के दूसरे सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट करने का फैसला लिया है।

प्रतापगढ़ में सबसे बुरा हाल, बीकानेर और बालोतरा भी पीछे नहीं आंकड़ों की बात करें तो सबसे डरावनी तस्वीर प्रतापगढ़ जिले से आई है, जहां सर्वाधिक 26 स्कूल भवन जर्जर मिले हैं। इसके बाद बीकानेर में 18, बालोतरा में 16 और झालावाड़ में 15 स्कूल भवनों की हालत बेहद खस्ता है। कुल 502 चिह्नित स्कूलों में से 290 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को उसी परिसर के दूसरे सुरक्षित कमरों में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन बाकी 212 स्कूलों में ताला लगाकर बच्चों को नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में भेजा जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर सीताराम जाट ने साफ किया है कि जब तक मरम्मत पूरी नहीं होती, बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

शिफ्ट में चलेंगी क्लास, अभिभावकों को देनी होगी लिखित सूचना शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि बच्चों की संख्या ज्यादा होती है, तो स्कूल दो शिफ्ट (सुबह और दोपहर) में चलाए जाएं ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों (MGGS) के लिए भी यही निर्देश हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने कहा है कि शिफ्टिंग की जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाए और सभी अभिभावकों को लिखित में सूचित किया जाए। मकसद साफ है कि स्कूल बदलने के चक्कर में कोई बच्चा पढ़ाई न छोड़े।

ड्रॉपआउट रोकने के लिए शिक्षकों की ‘स्पेशल ड्यूटी’ स्कूल शिफ्ट होने के कारण कहीं छात्र स्कूल आना न छोड़ दें (ड्रॉपआउट), इसके लिए शिक्षकों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें न केवल अभिभावकों के संपर्क में रहना होगा, बल्कि वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर बच्चों की हाजिरी की मॉनिटरिंग भी करनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों और सीबीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग करें ताकि बच्चों का भविष्य और जान दोनों सुरक्षित रहें। अब देखना यह है कि कागजों पर जारी ये आदेश धरातल पर कितनी जल्दी इन मासूमों को सुरक्षित छत दिला पाते हैं।

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