कोटा। कोटा के नयापुरा चिड़ियाघर से मादा लेपर्ड के पिंजरे की जाली तोड़कर बाहर निकलने के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में पता चला है कि जिस पिंजरे में लेपर्ड को रखा गया था, वह पुराना और कमजोर था तथा जाली में पहले से जंग लगी हुई थी। लेपर्ड ने जाली पर जोर लगाया तो उसमें गैप बन गया और वह पिंजरे से बाहर निकल गई।
घटना 8 सितंबर की सुबह की बताई जा रही है। पिंजरे से निकलने के बाद मादा लेपर्ड चिड़ियाघर परिसर से होते हुए सीवी गार्डन तक पहुंच गई। सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचे लोगों ने उसे करीब 40 फीट से ज्यादा ऊंचे जामुन के पेड़ पर बैठे देखा। लेपर्ड को पेड़ पर देखकर लोगों में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस एवं वन विभाग को सूचना दी गई।

3 घंटे की मशक्कत के बाद हुआ रेस्क्यू
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब 3 से साढ़े 3 घंटे की मशक्कत के बाद टीम ने पेड़ पर बैठी मादा लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित नीचे उतारा।
रेस्क्यू के बाद लेपर्ड को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उसका मेडिकल परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। उसकी उम्र करीब 2 साल और वजन लगभग 35 से 40 किलो बताया गया है।

रेस्क्यू के सिर्फ दो दिन बाद जू में छोड़ा था
खास बात यह है कि मादा लेपर्ड को 6 सितंबर को ही सवाईमाधोपुर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर नयापुरा चिड़ियाघर में छोड़ा था। यानी जू से भागने की घटना के महज दो दिन पहले ही उसे यहां लाया गया था।
विभाग ने 7 सितंबर को लेपर्ड की निगरानी भी की थी और उसे मीट दिया गया था। इसके बाद रात के समय उसने पिंजरे की जाली पर जोर लगाया और उसमें गैप बन गया। इसी गैप से वह बाहर निकल गई।
केयरटेकर वसीम APO
घटना के बाद वन विभाग ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है। वहीं लेपर्ड की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रोबेशनरी केयरटेकर वसीम को APO कर दिया गया है।
DFO प्रमोद धाकड़ के अनुसार केयरटेकर की जिम्मेदारी केज और वन्यजीव की देखरेख करना थी। इसी वजह से कार्रवाई करते हुए उसे APO किया गया है। मामले की जांच CCF कार्यालय में कार्यरत DFO को सौंपी गई है।
जू में चार पद स्वीकृत, तीन खाली
जांच में स्टाफ की कमी का पहलू भी सामने आया है। नयापुरा जू में केयरटेकर के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन पद खाली बताए जा रहे हैं। ऐसे में वसीम अकेला केयरटेकर था, जिसके जिम्मे लेपर्ड के साथ पिंजरे में बंद भालू समेत अन्य वन्यजीवों की देखरेख भी थी।
वसीम को करीब एक साल पहले उसके पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। उसकी ड्यूटी रात के समय नहीं बल्कि दिन में थी। अब विभाग यह जांच कर रहा है कि पिंजरे की स्थिति खराब होने के बावजूद उसकी मरम्मत या निगरानी में लापरवाही तो नहीं हुई।
जयपुर में टाइगर हमले के बाद कोटा की घटना ने उठाए सवाल
वन्यजीवों की सुरक्षा और जू प्रबंधन को लेकर यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि 2 सितंबर को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर के हमले से एक महिला मजदूर की मौत हो गई थी। उस मामले में टाइगर के पिंजरे का गेट खुल जाने की बात सामने आई थी।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद चिड़ियाघरों में पिंजरों की सुरक्षा, स्टाफ की उपलब्धता और वन्यजीवों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। कोटा मामले में अब जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि लेपर्ड के कमजोर पिंजरे की जानकारी विभाग को पहले से थी या नहीं और सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई।
