उदयपुर की 48 नर्सिंग छात्राएं चंडीगढ़ में परीक्षा से वंचित, 45 हजार रुपए फीस लेने के बाद भी एडमिट कार्ड नहीं मिलने का आरोप

उदयपुर। नर्सिंग प्रथम वर्ष की परीक्षा देने चंडीगढ़ पहुंचीं उदयपुर संभाग की 48 छात्राओं को परीक्षा केंद्र पर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलने का मामला सामने आया है। छात्राओं का आरोप है कि संबंधित संस्थान की ओर से परीक्षा शुल्क जमा नहीं कराया गया, जिसके चलते उन्हें परीक्षा से वंचित रहना पड़ा। परीक्षा नहीं दे पाने से छात्राएं परेशान हैं और उन्होंने उदयपुर प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, उदयपुर के श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में नर्सिंग प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहीं ये छात्राएं परीक्षा देने के लिए चंडीगढ़ पहुंची थीं। छात्राओं का कहना है कि संस्थान की ओर से उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद एडमिट कार्ड मिल जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर वे परीक्षा देने पहुंचीं, लेकिन वहां उन्हें न तो एडमिट कार्ड मिला और न ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई।

45 हजार रुपए फीस लेने के बाद परीक्षा प्रक्रिया अधूरी होने का आरोप

छात्राओं के मुताबिक, परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि संस्थान की ओर से परीक्षा शुल्क जमा नहीं कराया गया था। छात्राओं का दावा है कि उनसे फीस के रूप में करीब 45 हजार रुपए लिए गए थे। इसके बावजूद परीक्षा से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

संस्थान प्रबंधन से संपर्क नहीं होने का दावा

परीक्षा से वंचित होने के बाद छात्राएं संस्थान प्रबंधन से लगातार संपर्क करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, छात्राओं का आरोप है कि फोन करने के बावजूद उनकी कॉल रिसीव नहीं की जा रही हैं। ऐसे में उनके सामने परीक्षा दोबारा देने, शैक्षणिक सत्र और भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।

प्रशासन से जांच और समाधान की मांग

छात्राओं ने उदयपुर प्रशासन से पूरे मामले की जांच करवाने, जिम्मेदारी तय करने और उन्हें परीक्षा में शामिल होने का उचित अवसर दिलाने की मांग की है। छात्राओं का कहना है कि उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए तथा मामले का जल्द समाधान किया जाना चाहिए।

इस मामले में श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। मामले में संस्थान का आधिकारिक पक्ष और प्रशासन की कार्रवाई सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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