
जयपुर। राजधानी जयपुर में साइबर क्राइम का अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर करीब 400 करोड़ रुपए की ‘डिजिटल मुद्रा’ गायब कर दी। यह ठगी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के पोर्टल से जुड़ी है, जिसने सरकारी डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के अनुसार, यह एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का काम है। मामले में जोधपुर से पांच आरोपियों—निर्मल सोनी, सुल्तान, नंदकिशोर, अशोक भंडारी और प्रमोद खत्री—को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना अब भी फरार है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का कनेक्शन दुबई से जुड़ा हुआ है।
फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से किया खेल
आरोपी फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए डिजिटल सिग्नेचर तैयार करते थे। हैरानी की बात यह है कि इन सिग्नेचर को दुबई में डाउनलोड किया जाता था, ताकि भारतीय एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। इसके बाद DGFT पोर्टल पर असली निर्यातकों की प्रोफाइल हैक कर मोबाइल नंबर और ईमेल बदल दिए जाते थे।
ऐसे उड़ाए 400 करोड़
सरकार निर्यातकों को टैक्स रिफंड के बदले ‘ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स’ देती है, जो एक तरह की डिजिटल करेंसी होती है। ठगों ने इन स्क्रिप्स को फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिया और फिर उन्हें सस्ते दामों पर बेचकर नकदी में बदल दिया।
शिकायत से खुला राज
इस बड़े घोटाले का खुलासा दिसंबर 2025 में हुआ, जब उद्योगपति सौरभ चाफना ने 17.88 लाख रुपए की स्क्रिप्स गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो यह आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते 400 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
सिस्टम की बड़ी चूक उजागर
इस पूरे मामले ने सरकारी पोर्टल और डिजिटल सिग्नेचर सिस्टम के बीच सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है। ठगों ने तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर पूरे सिस्टम को ही चकमा दे दिया।
केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट
यह देश में संभवतः पहला मामला है, जिसमें सरकारी ड्यूटी स्क्रिप्स की इतनी बड़ी चोरी सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए DGFT और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस अब दुबई में बैठे सरगना और पूरे नेटवर्क को पकड़ने में जुटी है।
