
पटना/न्यूयॉर्क। भारत के दिग्गज उद्योगपति और वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल (49) का बुधवार रात निधन हो गया। अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसके बाद उनका न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। 7 जनवरी को अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा, जो जानलेवा साबित हुआ। बेटे के जाने की खबर खुद अनिल अग्रवाल ने बेहद भावुक पोस्ट के जरिए सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने लिखा, “मेरा बेटा अग्निवेश हमें छोड़कर चला गया। यह मेरे जीवन का सबसे अंधकारमय दिन है।”
अग्निवेश के आकस्मिक निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने एक्स (X) पर रिप्लाई करते हुए लिखा, “अग्निवेश अग्रवाल का जाना झकझोर देने वाला है। ईश्वर परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दे।” 3 जून 1976 को पटना में जन्मे अग्निवेश ने अजमेर के मेयो कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। उनका विवाह श्री सीमेंट परिवार की पूजा बांगर से हुआ था। उनके पीछे परिवार में पत्नी, पिता अनिल अग्रवाल और बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं।

तकनीक और व्यापार में छोड़ी अलग पहचान अग्निवेश केवल एक अमीर विरासत के वारिस ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने उद्योग जगत में अपनी काबिलियत भी साबित की थी। वे 2019 तक ‘हिंदुस्तान जिंक’ के चेयरमैन रहे और उनके कार्यकाल में कंपनी ने माइनिंग की अंतरराष्ट्रीय तकनीक अपनाई। उन्होंने यूएई (UAE) में ‘फुजैराह गोल्ड’ जैसी बड़ी गोल्ड रिफाइनरी खड़ी करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वे हेल्थकेयर सेक्टर में एक सक्रिय एंजेल इन्वेस्टर भी थे।
बेटे से किया वादा करेंगे पूरा: दान करेंगे 75% कमाई अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में एक बड़ा संकल्प दोहराया। उन्होंने बताया कि वे अपने बेटे अग्निवेश से किए वादे को पूरा करते हुए अपनी निजी कमाई का 75% हिस्सा परोपकारी कार्यों के लिए दान करेंगे। बता दें कि अग्रवाल परिवार देश के सबसे अमीर परिवारों में शुमार है, जिनकी कुल नेटवर्थ करीब 3.66 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। अग्निवेश का जाना न केवल अग्रवाल परिवार के लिए, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
