
Udaipur में भाजपा नेत्री के कथित वायरल वीडियो और ब्लैकमेलिंग-रेप मामले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जांच अधिकारी बदले जाने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है और पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस घटनाक्रम के बाद Bharatiya Janata Party उदयपुर में तीन धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक धड़ा उन नेताओं और कार्यकर्ताओं का माना जा रहा है जिनका नाम किसी न किसी रूप में पूरे विवाद से जोड़ा जा रहा है। दूसरा धड़ा वह है जो लगातार इस मुद्दे को हवा दे रहा है और इसे सार्वजनिक बहस का विषय बना रहा है। वहीं तीसरा धड़ा ऐसे नेताओं का बताया जा रहा है जो न खुलकर समर्थन में बोल रहे हैं और न ही विरोध में, बल्कि पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय और पंचायतीराज चुनाव नजदीक होने के बीच इस तरह का विवाद अगर लंबा खिंचता है तो इसका असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि Indian National Congress इस मुद्दे को अभी तक बड़े स्तर पर भुना नहीं पाई।
Tikaram Jully ने जरूर विधानसभा में मामला उठाया, लेकिन स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता सीमित ही रही। इधर जांच अधिकारी बदलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच होगी। साथ ही 11 फरवरी की रात हुई कथित दबिश और मारपीट के आरोपों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर भाजपा पदाधिकारियों की हालिया बैठक में भी ‘उदयपुर फाइल्स’ चर्चा का विषय रही। सूत्रों के अनुसार कई नेताओं ने इस प्रकरण से दूरी बनाए रखने की बात कही है, जबकि घटनाक्रम की जानकारी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी गई है। फिलहाल संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार किया जा रहा है, लेकिन विवाद ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को जरूर उजागर कर दिया है।उदयपुर ‘वायरल वीडियो’ मामला: BJP में बढ़ी खींचतान, तीन गुट आमने-सामने
