अरावली बचाने सड़क पर उतरे वकील, कोर्ट से कलेक्ट्रेट तक रैली

बोले– प्रकृति से खिलवाड़ किसी भी हाल में मंजूर नहीं

उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर उदयपुर में विरोध की आवाज लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार को अधिवक्ता परिषद और बार एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर बड़ी संख्या में वकील सड़कों पर उतरे। सुबह कोर्ट परिसर से नारेबाजी करते हुए वकीलों ने रैली निकाली और जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एडीएम (प्रशासन) दीपेंद्र सिंह को सौंपा।

वकीलों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अरावली सुरक्षित नहीं रही तो न राजस्थान सुरक्षित रहेगा और न ही उदयपुर का भविष्य। सरकार से मांग की गई कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाते हुए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, मेवाड़ की जीवनरेखा

कलेक्ट्रेट के बाहर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि मेवाड़ की पहचान, पर्यावरण की सुरक्षा कवच और पानी की सबसे बड़ी जीवनरेखा है। अरावली के कमजोर होने से मौसम असंतुलन, अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं सामने आएंगी, जिसका सीधा असर आमजन के जीवन पर पड़ेगा।

विकास जरूरी, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं

बार एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने कहा कि विकास अपनी जगह जरूरी है, लेकिन प्रकृति से खिलवाड़ किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को अरावली से जुड़े फैसले लेते समय पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

सभी ने एक स्वर में उठाई अरावली बचाने की मांग

सभा को अधिवक्ता परिषद जिला अध्यक्ष मनीष शर्मा, पूर्व अध्यक्ष रमेश नंदवाना सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने संबोधित किया। बड़ी संख्या में युवा अधिवक्ता भी आंदोलन में शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर अरावली बचाने का संकल्प दोहराया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांग्रेस कार्यकर्ता भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज करा चुके हैं।

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