गैस संकट के साये में बदली रसोई की सूरत, उदयपुर में इंडक्शन की बिक्री 40% बढ़ी, होटल और घरों में बिजली के चूल्हों का दबदबा

उदयपुर। भविष्य की अनिश्चितता और गैस संकट के गहरे डर ने बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। लेकसिटी सहित प्रदेश के बड़े शहरों में पिछले एक हफ्ते के भीतर इंडक्शन चूल्हों और बिजली से चलने वाले उपकरणों की मांग में अप्रत्याशित उछाल दर्ज किया गया है। आलम यह है कि जो लोग अब तक केवल एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर थे, उन्होंने सुरक्षा और वैकल्पिक इंतजाम के तौर पर इंडक्शन को अपनी रसोई का अनिवार्य हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। बाजार के जानकारों की मानें तो पिछले सात दिनों में ही बिक्री का ग्राफ करीब 40 फीसदी तक ऊपर चढ़ गया है।

होटल व्यवसाय से जुड़े संचालकों ने भी अब अपनी रणनीति बदल ली है। उदयपुर जैसे पर्यटन केंद्र में जहां सैकड़ों छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट हैं, वहां गैस सप्लाई की किसी भी संभावित किल्लत से बचने के लिए भारी क्षमता वाले इंडक्शन कुकटॉप्स इंस्टॉल किए जा रहे हैं। होटल मालिकों का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की अनिश्चितता के बीच बिजली आधारित उपकरण न केवल किफायती साबित हो रहे हैं, बल्कि संचालन में भी सुरक्षित हैं। थोक व्यापारियों के पास स्टॉक कम पड़ने लगा है और कई नामी कंपनियों के मॉडल वेटिंग पर चले गए हैं।

आम जनता के बीच भी इस ट्रेंड का असर साफ दिख रहा है। मध्यमवर्गीय परिवारों में अब एलपीजी के साथ-साथ एक इंडक्शन चूल्हा रखना एक मजबूरी नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। इलेक्ट्रॉनिक स्टोर्स पर ग्राहकों की भीड़ इंडक्शन की कार्यक्षमता और बिजली खपत के बारे में पूछताछ करती नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि अचानक आई इस मांग के चलते कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी देखी जा रही है। गैस संकट के इस डर ने तकनीक के प्रति लोगों का नजरिया रातों-रात बदल दिया है और अब किचन हाई-टेक बिजली उपकरणों से लैस हो रहे हैं।

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