राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत
बागडे ने 99 पीएचडी धारको को डिग्री, 47 उत्कृष्ट विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा
बेटियों ने मारी बाजी 62 पीएचडी डिग्री एवं 35 गोल्ड मेडल पर बेटियों ने किया कब्जा
शिक्षा से ही समाज और राष्ट्र का उत्थान संभव – राज्यपाल बागड़े
भारतीय शिक्षा के गौरव को पुनः स्थापित करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका अहम – राज्यपाल बागड़े
पिछड़े और जनजातीय विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ना समय की जरूरत – राज्यपाल बागड़े
शिक्षा, कृषि और न्याय सुधार से सशक्त समाज का निर्माण – राज्यपाल बागड़े

उदयपुर। औपनिवेशिक नीतियों के कारण देश शिक्षा और स्थानीय उद्योगों से दूर हुआ, जिससे समाज में गरीबी और विसंगतियां बढ़ीं। इन चुनौतियों का समाधान केवल शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। विद्यार्थियों को निरंतर प्रयास, बड़ी सोच, एकाग्रता और गहन अध्ययन को जीवन का मूल मंत्र अपनाने का आह्वान करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था की उत्कृष्टता को स्थापित किया जा सकता है।
उक्त विचार राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने बुधवार को भूपाल नोबल्स संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
समारोह में बागडे का कार्यकारिणी के सदस्यों की ओर से 51 किलो की माला पहना कर भव्य स्वागत किया गया।
बागडे ने 99 पीएचडी धारकों को उपाधि एवं स्नातक एवं स्नातकोत्तर में 47 उत्कृष्ट विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा। जयपुर एवं उदयपुर एयरपोर्ट घने कोहरे के कारण बागडे दो घंटे विलम्ब से एयरपोर्ट पहुंचे।
समारोह पूर्वक बागड़े ने संस्थान परिसर में लगी महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन। एनसीसी केडेट्स के केडेट्स की ओर से बागडे को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
बागडे ने जनजातीय बाहुल्य जिलों में विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछड़े, घुमंतू और जनजातीय वर्ग से जुड़े विद्यार्थियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मजबूत करना होगा, तभी सामाजिक स्तर पर समानता संभव हो पाएगी।
बागडे ने महाराणा भूपाल सिंह को नमन करते हुए कहा कि आजादी से पूर्व 1923 में वंचित वर्ग को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडने के उद्देश्य से दो छात्रों से प्रारंभ होेकर आज वटवृक्ष रूप खडी है जहॉ 10 हजार नियमित छात्र अध्ययनरत है। उन्होेंने दूरदृष्टिता का परिचय देते हुए विभिन्न वर्गो को शिक्षा प्रसार हेतू भूमि दान की एवं स्वतंत्रता प्राप्त होते ही समस्त रियासतों को एक करने का प्रारंभ मेवाड से किया। मेवाड के युग पुरूष बप्पारावल ने मोहम्मद बिन कासिम को अफगानिस्तान तक पीछा करके पराजित किया एवं पुनः लौटते समय पंजाब जिस स्थान पर कुछ समय रहे उस स्थान का नाम आज भी रावलपिंडी के नाम से जाना जाता है।
बागड़े ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और उसके स्वर्णिम गौरव को पुनः स्थापित करने में विश्वविद्यालयों की निर्णायक भूमिका है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में देश फिर से विश्व में नेतृत्वकारी स्थान प्राप्त कर सके।
मैकाले शिक्षा ने किया देश को किया तहस नहस:-
बागडे ने कहा कि आदिकाल से हमारा देश समृद्ध, खुशहाल एवं सोने की चिडिया रहा, लेकिन अंग्रेजो के आने के बाद 1835 में मैकाले की शिक्षा ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को ही तहस नहस कर दिया जिसके परिणाम आज भी देखने को मिले रहे। प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा 2020 के माध्यम से इसके सुधारे का काम शुरू किया है।
जनजाति बाहुल्य को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत – बागड़े
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे ने कहा कि मेवाड का जनजाति बाहुल्य क्षेत्र आज भी देश की मुख्यधारा से नही जुड पाया है। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा से जोडने का आव्हान किया।
आत्मनिर्भर और आधुनिक मेवाड़ के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है – प्रो. सोडाणी
विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल राजस्थान के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि आत्मनिर्भर और आधुनिक मेवाड़ के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। उन्होंने शोध, डिजिटल आधारित शिक्षा और डिजिटल अपग्रेड को समय की जरूरत बताते हुए मानसिक गुलामी से मुक्ति के लिए देश के अपने सोशल प्लेटफॉर्म विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विदेशी सोशल मीडिया के विकल्प तलाशने, शिक्षा में परिवर्तन, शिक्षकों की भूमिका में सुधार तथा विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग कर समाज को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। प्रो. सोडाणी ने कहा कि आज का भारत आत्मसम्मान और स्वदेशी सोच के साथ औपनिवेशिक मानसिकता से आगे बढ़ते हुए नए प्रगति पथ पर अग्रसर है।
दीक्षांत ज्ञान को संस्कार और कर्म में रूपांतरित करने का पर्व है – प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत
शिक्षा का उद्देश्य अर्जन नहीं, अर्पण है – प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत
सत्य, सेवा और संयम से ही राष्ट्र निर्माण संभव – प्रो. कर्नल एस.एस. सारंगदेवोत
अध्यक्षता करते हुए कायर्सवाहक अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि दीक्षांत भारतीय शिक्षा परंपरा का वह विशिष्ट क्षण है, जब शिक्षा केवल बौद्धिक उपलब्धि न रहकर जीवन मूल्यों और संस्कारों का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि यह समय समाज और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व को स्वीकार करने का संकल्प लेने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को शिक्षार्थी से जिम्मेदार नागरिक बनने तथा साधना से कर्मयोग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य केवल ज्ञान का संचय नहीं, बल्कि उसे मानव कल्याण और राष्ट्र सेवा में समर्पित करना है।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि शिक्षा में समता के बिना सच्ची सफलता संभव नहीं है। जीवन में साहस, धर्म के मार्ग पर आस्था और कर्म में ईमानदारी ही व्यक्ति को ऊंचाइयों तक ले जाती है। भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उपनिषद समाज कल्याण के माध्यम से अमृतत्व का संदेश देते हैं, वहीं श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान की पवित्रता और उसकी महान परंपरा से हमारा परिचय कराती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सभी के लिए एक्सेस, एक्नेटेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके। उन्होंने स्थानिक जड़ों से जुड़ी किंतु वैश्विक दृष्टिकोण वाली शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टि के साथ संवेदनशील, नैतिक और मूल्य आधारित सोच का निर्माण होना चाहिए।
उन्होंने आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे सत्य, सेवा और संयम को अपने जीवन के मूल स्तंभ बनाएं, स्वतंत्र सोच के साथ निर्णय लें और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने ज्ञान से समाज, राष्ट्र और विश्व को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करें।
डिग्री एवं मेडल पर बेटियों ने किया कब्जा:-
प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड ने बताया कि 7 हजार से अधिक विद्या प्रचारिणी सभा कार्यकारिणी पदाधिकारी, सदस्य, विद्यार्थी एवं शहर के गणमान्य नागरिको की गरिमामय उपस्थिति में राज्यपाल बागडे ने 99 पीएचडी धारकों को उपाधि एवं स्नातक एवं स्नातकोत्तर में 47 उत्कृष्ट विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा एवं 2025 डिग्रियों को अवार्ड की। 62 पीएचडी उपाधि, 35 गोल्ड मेडल पर बेटियों ने कब्जा किया।
प्रांरभ में अध्यक्ष प्रो. चेतन सिंह चौहान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड, रजिस्ट्रार डॉ. एनएन सिंह, अध्यक्ष प्रो. चेतन सिंह चौहान, प्रो. जब्बर सिंह टाडावाडा, प्रो. दरियाव सिंह चुण्डावत, राजेन्द्र सिंह ताणा, शक्ति सिंह कारोही, प्रो. एकलिंग सिंह झाला, नवल सिंह जुड, डॉ. युवराज सिंह राठौड, कमलेश्वर सिंह सारंगदेवोत, करण सिंह उमरी, कुलदीप सिंह ताल, मानसिंह चुण्डावत, सुरेन्द्र प्रताप सिंह रूद, महेन्द्र सिंह पाखंड, महेन्द्र सिंह पाटिया, ग्रुप केप्टन गजेन्द्र सिंह , दिलिप सिंह राठौड, चन्द्रवीर सिंह करेलिया, डॉ. रेणु राठौड़, भानु प्रताप सिंह, विद्यापीठ के रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. सरोज गर्ग, पीजी डीन प्रो. प्रेमसिंह रावलोत, डॉ. मोहन सिंह, प्रो. माधवी राठौड, डॉ. भुपेन्द्र सिंह चौहान, डॉ. राजेन्द्र सिंह शक्तावत, डॉ. रजनी अरोडा, डॉ. शशी चितौडा, डॉ. दिलिप सिंह चौहान सहित शहर के गणमान्य नागरिक, सार्वजनिक और राजनैतिक और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े ख्यातनाम लोगों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
संचालन डॉ. अनिता राठौड़ ने किया।
